क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
हरदुआगंज के तिहरे हत्याकांड को लेकर ‘अमर उजाला’ ने सोमवार को ही इशारा किया था साधुओं की हत्या के सहारे सरकार निशाने पर है। मंगलवार को पुलिस ने इस इशारे को सही साबित किया है। एसएसपी अजय कुमार साहनी स्वीकार करते हैं कि घुमंतू जाति के हत्यारे बेशक लूटपाट के इरादे से हत्याएं करते घूम रहे थे, मगर इसके पीछे इनकी मंशा सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने और अपने विरोधियों को फंसाने की थी।
साधुओं को निशाना बनाने के पीछे मकसद यह था कि चूंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है और विश्वविख्यात गौरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ सूबे के सीएम हैं। ऐसे में साधु निशाना बनेंगे तो पुलिस आनन-फानन हरकत में आएगी। माहौल बिगड़ेगा और घटनास्थल पर विरोधियों के खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे तो आनन-फानन बिना कुछ सोचे समझे पुलिस उनके दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई कर देगी। मगर जब ट्रिपल मर्डर के बाद पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले और खबर डीजी व एडीजी तक पहुंचाई गई तो एडीजी व डीआईजी की मॉनीटरिंग में एसएसपी को कैंप कर खुलासे के लिए लगाया गया। एसएसपी साहनी ने भी तीन दिन जंगलों में कैंप कर घटना की एक-एक परत खोल दी।
दो समुदायों से ताल्लुक रखता है गैंग लीडर
एसएसपी अजय कुमार साहनी के अनुसार गैंग लीडर साबिर उर्फ दिनेश प्रताप सिंह जाति से दलित है। वह एससी-एसटी के आरक्षण का लाभ उठाकर पूर्व में दिनेश प्रताप के नाम से सभासद रह चुका है, जबकि उस समय तक बिना सुन्नत के अपना धर्म परिवर्तन कर चुका था। उसने स्वीकार किया कि एटा किदवई नगर में अपनी जमीन पर कॉलोनी काट रहा था। जहां संपत्ति विवाद में उसने मदरसे की जमीन न छोड़ने वाले मुफ्ती शहजाद की हत्या 2016 में शूटरों को सुपारी देकर कराई थी। उस हत्या के बाद धार्मिक माहौल बिगड़ा था। इस हत्या में साबिर उर्फ दिनेश व उसका बेटा जेल गए थे।
जेल में बना गैंग और रची गई साजिश
जेल में उसकी मुलाकात पहले से साधुओं की हत्या में निरुद्ध बाबरिया घुमंतू जाति के असगर, अफसर व पाश मोहम्मद उर्फ पाशा से हुई। साबिर जमानत पर छूट आया और मुफ्ती के परिजनों पर फैसले का दबाव बनाने लगा। मगर वह नहीं माने। इस पर उसने जेल के दोस्त पाश मोहम्मद उर्फ पाशा से मुलाकात कर यह षड्यंत्र रचा। इसी षड्यंत्र के तहत तय हुआ कि साबिर सभी की जमानत कराएगा। वे लोग साधुओं की हत्या कर साबिर के विरोधियों को फंसाएंगे। इसके बदले साबिर 15 लाख रुपये देगा। धार्मिक भावनाएं आहत होंगी और सरकार की छवि पर विपक्षी दल दबाव बनाएंगे। पुलिस को जो साक्ष्य सामने दिखेंगे, उन्हीं पर संदिग्ध लोगों को जेल भेज देगी। एटा में चूंकि लोग इन्हें पहचानते थे, इसलिए अलीगढ़ जिला चुना गया। वे लोग अतरौली में बेस बनाकर रहे और देहात में रेकी कर घटनाओं को अंजाम दिया। इस दौरान साबिर ने अफसर की तो जमानत करा ली। उसने बाहर आकर अपने पुराने साथी मुस्तकीम उर्फ अफसर, सलमान व नौशाद आदि से संपर्क किया।
गैंग के अन्य सदस्यों का नहीं कोई पक्का पता
इस गैंग के अफसर, मुस्तकीम, सलमान, नौशाद आदि का कोई मूल पता नहीं है। वह हर जगह नाम व पते बदलकर रहते हैं। फिलहाल अतरौली कस्बे में रह रहे थे। इससे पूर्व मुस्तकीम आदि कस्बा छर्रा के मोहल्ला शिवपुरी में नए नाम व पते के साथ रह रहे थे। पूर्व में ये लोग अन्य नाम से जनपद कासगंज व एटा में रह चुके हैं। जबकि मुस्तकीम आदि मूलत: बिहार के रहने वाले हैं। अभियुक्त अफसर आदि कासगंज में डकैती दिनदहाड़े डकैती व हत्या में जेल जा चुके हैं।
छैमार गैंग से भी जुड़े हैं तार
एसएसपी के अनुसार इस घुमंतू गैंग का सरगना पाशा एटा जेल में निरुद्ध है। उसके छैमार गैंग से संपर्क हैं। पिछले दिनों कासगंज में हुईं डकैती युक्त हत्याओं में जो छैमार शामिल थे और अलीगढ़ में मारे गए, उनके इस गैंग से संपर्क हैं। जल्द उनके सुराग पाशा को रिमांड पर लेकर तलाशे जाएंगे।