फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गैंगरेप का झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर फंसी पीड़ित

विज्ञापन
विज्ञापन
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
विज्ञापन


गैंगरेप के एक झूठे मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए शिकायतकर्ता महिला व मुकदमे के गवाहों के खिलाफ परिवाद दर्ज कर लिया है। इस गैंगरेप में एक बैंक मैनेजर को झूठा आरोपी बना दिया गया था।

बता दें कि महिला की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता पर पूर्व में इसी तरह झूठे मुकदमे दर्ज कराने पर हाईकोर्ट के निर्देश पर गैंगेस्टर का मुकदमा कायम हो चुका है और वह अन्य लोगों के साथ जेल भी जा चुका है।
विज्ञापन


जिले में संभ्रांत लोगों पर फर्जी रेप का केस लगवाने वाला गिरोह लंबे समय से सक्रिय हैं। इसी क्रम में गभाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने 25 मई 2010 को अपने समधी व तीन अन्य लोगों के खिलाफ गैंगरेप व लूटपाट का मुकदमा कायम कराया। इस मुकदमे को झूठा पाए जाने पर पुलिस ने विवेचना के उपरांत इसमें एफआर लगा दी।

इसके बाद इस मुकदमे में उस समय नया मोड़ आ गया, जब एक अज्ञात अभियुक्त की पहचान बैंक मैनेजर प्रेमप्रकाश के रूप में कर दी गई। बाद में विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता महिला ने यह शपथपत्र दिया कि वह बैंक मैनेजर को नही जानती। उसका नाम तो उसके अधिवक्ता शिवकुमार शर्मा ने अपनी रंजिश के तहत लिखाया है। इस आधार पर पुलिस ने इस मुकदमे में फिर अंतिम रिपोर्ट लगा दी।

मैनेजर प्रेमप्रकाश द्वारा झूठा मुकदमा लिखाए जाने पर कोर्ट में उक्त महिला व अन्य के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया। एसीजेएम कोर्ट संख्या छह ने इस पर उक्त मामले में उक्त महिला व मुकदमे के गवाहों सहित चार के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया है। बैंक मैनेजर की ओर से आकाश सिंघल एडवोकेट ने पैरवी की।
विज्ञापन


बता दें कि यह मुकदमा शिवकुमार ने ही 156/3 के तहत दायर किया था, जिस पर अदालत ने कार्रवाई की है। पूर्व में भी आकाश सिंघल व प्रेमप्रकाश आदि पर शिवकुमार झूठे मुकदमे दर्ज करा चुके हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें