क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
टप्पल में हुई मुठभेड़ में मारे गए छैमार गैंग के सरगना भीका के शव को उसके गांव चिनियावली के प्रधान नूर मोहम्मद की मौजूदगी में बुधवार देर रात टप्पल के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस दौरान परिवार का कोई सदस्य साथ नहीं आया। प्रधान की मानें तो गांव की मढ़ैया से पिछले करीब तीन साल से छैमार गायब हैं। बीच में कभी कोई एकाध सदस्य जरूर आता रहा है। मगर कुछ अता-पता नहीं है।
इस मुठभेड़ में भीका की बेटी का आधार मिलने पर पुलिस टीम आधार कार्ड लेकर चिनियावली संभल गई थी। वहां प्रधान ने उसे पहचान लिया और स्वीकारा कि करीब तीन साल पहले उसने यह आधार कार्ड भीका के कहने पर बनवाया था।
इसके बाद से उन लोगों का पता नहीं है। पुलिस टीम प्रधान को यहां देर शाम टप्पल लेकर पहुंची। यहां लाने का मकसद शव की पहचान कराना था। देर रात करीब 9 बजे प्रधान नूरमोहम्मद अपने साथ एक ग्रामीण को लेकर टप्पल पहुंचे।
इस पर शव को जिला मुख्यालय से टप्पल पहुंचाया गया। जहां पहचान के बाद उसको टप्पल कब्रिस्तान में ही दफन करा दिया गया। इंस्पेक्टर टप्पल संजय पांडेय के अनुसार प्रधान ने बताया कि यह लोग पेशेवर अपराधी थे।
इसलिए गांव के लोगों से ज्यादा नाता नहीं रहता था। हां, यह अपने साथ गधे व घोड़े जरूर पालते हैं, जिनकी मदद से अपना सामान इधर से उधर शिफ्ट करते हैं।