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टप्पल ---25 सवालों के जवाब जानने को रिमांड पर लिए जाएंगे असलम-जाहिद

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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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ढाई साल की मासूम की हत्या में जेल भेजे गए चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस की एसआईटी आरोपियों को सजा दिलाने की दिशा में हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। जांच में किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरतने की कवायद की जा रही है।

इसी कड़ी में अब एसआईटी के विवेचकों द्वारा बच्ची की हत्याकांड के दो मुख्य आरोपियों जाहिद और असलम को रिमांड पर लेने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में विवेचक की ओर से शनिवार को अदालत में अनुरोध याचिका दायर की गई है। जिस पर दोनों को अदालत ने सोमवार को जेल से तलब किया है।
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उसके बाद ही दोनों को रिमांड पर दिए जाने का फैसला होगा। पुलिस द्वारा 25 सवालों की एक प्रशभनोत्तरी इन दोनों से पूछताछ के लिए तैयार की गई है। पुलिस का मानना है कि इन सवालों के जवाब कलमबद्ध किए जाएंगे। सोमवार को दोनों की पेशी के समय ही उनको रिमांड पर देने का समय तय किया जाएगा।

पुलिस का प्रयास है कि कम से कम दोनों को 24 घंटे के लिए रिमांड पर लिया जा सके। एसएसपी आकाश कुलहरि ने दोनों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में याचिका दायर करने की पुष्टि की है।

कोर्ट से मिली पोस्टमार्टम के फॉरेंसिक अध्ययन की अनुमति

बच्ची की हत्या की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के दौरान की वीडियोग्राफी में पुलिस ने 15 सवालों के जवाब और पोस्टमार्टम का विश्लेषण जरूरी समझा है। ताकि स्पष्ट हो सके कि बच्ची के शरीर में जो भी चोटें हैं, वह कैसे आईं।

इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए यह रिपोर्ट लखनऊ और चंडीगढ़ विधि विज्ञान प्रयोगशाला के फॉरेंसिक एक्सपर्टों के पास अध्ययन के लिए भेजी गई है। शनिवार को अदालत से इसकी अनुमति लेने के बाद पुलिस ने दो विशेष संदेशवाहक दोनों जगहों पर रवाना कर दिए हैं।

हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद बच्ची के मस्तिष्क की विसरा की रिपोर्ट का इंतजार है। ये विसरा रिपोर्ट पांच छह दिनों में ही आने की उम्मीद है। रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट रूप से बच्ची की मौत का कारण सामने आएगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची की मौत का कारण मारपीट से लगा सदमे से होने का अंदेशा है।

साथ में शरीर में अनगिनत चोटों का उल्लेख है। इनमें नाक की हड्डी टूटना, शरीर के कुछ अंदरूनी और बाहरी पार्ट गायब होने जैसे तथ्य हैं। पोस्टमार्टम में बताया गया था कि शव गला हुआ था। ऐसे में एक्सपर्ट ही यह बता पायेगा कि चोट किस वजह से आई हैं।

इसे पीटा गया था या पार्ट गायब किए गए या फिर किसी जानवर की वजह से यह हुआ है। इसके चलते पुलिस की विवेचक टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का फारेंसिक एक्सपर्ट से अध्ययन कराना जरूरी समझ रही है। इसी क्रम में पुलिस ने पोस्टमार्टम से जुड़े 15 ऐसे सवालों की प्रशभनोत्तरी बनाई है, जिनके जवाब पोस्टमार्टम के डॉक्टर नहीं दे सकते हैं।

इन सवालों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट व वीडियोग्राफी कापी के साथ लखनऊ व चंडीगढ़ फॉरेंसिक एक्सपर्ट के पास भेजा गया है। एसएसपी आकाश कुलहरि के अनुसार इसकी बाकायदा शनिवार को कोर्ट से अनुमति ली गई है। इसके बाद ही विशेष संदेशवाहक के जरिये इन्हें वहां भेजा गया है।

-पुलिस द्वारा अभी तक कराई जा रही प्रक्रिया संतोष जनक है। शनिवार को भी हम बयान दर्ज कराने गए थे। मगर शपथ पत्र पर बयानों की औपचारिकताओं के चलते यह काम पूरा नहीं हो सका। न तो अदालत में बयान दर्ज हुए और न मजिस्ट्रेटी जांच में बयान दर्ज कराने पहुंच सके। अब सोमवार को पुन: दीवानी जाएंगे और बयानों की शेष औपचारिकता पूरी कराएंगे।-बच्ची के पिता

एसआईटी जांच के महत्वपूर्ण पहलू

-कोर्ट में बयान नहीं हुए बयान, पहले शपथ पत्र पर तैयार हुई गवाही:-इस हत्याकांड में बच्ची के पिता मुकदमे के वादी हैं। पुलिस का प्रयास था कि वादी के अदालत में बयान दर्ज करा दिए जाएं। इसी प्रयास के तहत शुक्रवार को पिता को यहां दीवानी तक लाया भी गया था। मगर पिता की बच्ची से जुड़ी भावनात्मक यादों के चलते तबियत ऐसी हो गई कि वह बयान देने को तैयार न हुआ। इसके चलते उसे वापस जाना पड़ गया। इसी क्रम में शनिवार को फिर पिता व बाबा को दीवानी लाया गया। मगर यहां अधिवक्ताओं व एसआईटी विवेचकों से राय-शुमारी के बाद तय हुआ कि बच्ची के पिता व बाबा के 164 के तहत बयान कोर्ट में कराने से पहले शपथ पत्र पर दर्ज कर लिए जाएं, जिन्हें विवेचना का हिस्सा बनाया जाए। चार्जशीट में यह शपथ पत्र के बयान शामिल होंगे। शनिवार को यह दोनों शपथ पत्र तैयार कराकर एसएसपी को दिखाए गए। बच्ची के पिता के अनुसार अभी उनका नोटरी होना बाकी है। सोमवार को वह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।


पुलिस स्तर से नहीं कराया जा रहा किसी का भी डीएनए:-बच्ची के कपड़ों को डीएनए सैंपलिंग के लिए भेजे जाने के सवाल पर एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि इस मामले में डीएनए कराने की जरूरत ही नहीं है। इसलिए पुलिस के स्तर से डीएनए कराने जैसी कोई कवायद नहीं की जा रही है। हां, डीएनए शव की पहचान या रेप जैसे मामलों में रेप के आरोपी का घटनास्थल पर स्वाब मिलने पर कराया जाता है। इस प्रकरण में ऐसा कुछ नहीं है। इसलिए डीएनए कराए जाने का कोई मतलब नहीं बनता।
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सभी फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही बढ़ेंगी धाराएं:-पुलिस विवेचना में मुकदमे में धाराएं बढ़ाने की सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ के बाद सवालों का जवाब मिलने और फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद धाराएं बढ़ाई जाएंगी। एसएसपी ने बताया कि अभी तक हमारे पास धाराएं बढ़ाने के लिए कोई मजबूत तथ्य नहीं है। इसलिए यह धाराएं नहीं बढ़ पाई हैं। मगर एक सप्ताह में यह सभी औपचारिकताएं पूरी कर धाराएं बढ़ाने का काम भी किया जाएगा।
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