न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
सिकंदराराऊ। उस बेचारी लाचार मासूम का क्या कसूर था, जो उसे तीन बाद ही गांव में कूड़े के ढेर पर फेंक दिया गया। क्या वो मां की भूल थी या फिर उसे बेटी होने की सजा मिली। यह सवाल गुरुवार की सुबह हर उस शख्स की जुबां पर था, जिसने भी गांव आलमपुर में कूड़े के ढेर पर एक बालिका की किलकारियां सुनीं। हालांकि बाद में एक शख्स ने इस नवजात कन्या को गोद ले लिया।
घटना क्षेत्र के गांव आलमपुर की है। गुरुवार की सुबह गांव के बाहर कूड़े पर एक नवजात बच्चे की किलकारियां गांव के लोगों ने सुनीं तो वह उस ओर आकर्षित हुए। पास जाने पर देखा तो पाया कि एक नवजात कन्या आसमान की तरफ देखकर रो रही थी। आनन फानन बात चारों तरफ फैली तो बच्ची को देखने के लिए भीड़ लग गई। इसे लेकर वहां तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
गांव लिहा का ही प्रमोद नामक किसान आगे आया और उसने बच्ची को गोद ले लिया और अपने घर ले आया। चूंकि प्रमोद के बेटे ही हैं, इसलिए उसे एक बेटी की चाहत थी, जिसे ऊपर वाले ने पूरा कर दिया। इसके बाद प्रमोद बच्ची को लेकर सीएचसी पर आया और चिकित्सकों से उसका परीक्षण कराया। परीक्षण में बच्ची स्वस्थ पाई गई।
इसके बाद प्रमोद ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी कि वह बच्ची गोद ले रहा है और अपने साथ ले जा रहा है। इस प्रकार बच्ची मौत के मुंह में जाते जाते तो बची ही, साथ ही उसे आसरा भी मिल गया। कोतवाल मनोज कुमार शर्मा का कहना था कि इतनी छोटी बच्ची को इस प्रकार से फेंकना गैर कानूनी है।