कोरोना से मरीज की मौत होना बताकर उसका कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार कराना और फिर निगेटिव रिपोर्ट देना स्वास्थ्य अधिकारियों के गले ही आफत बनता दिख रहा है। शहर के नगला मेहताब के संविदासफाईकर्मी की मौत के ऐसे ही एक मामले में न्यायालय में स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जिसमें घोर लापरवाही व अनदेखी का आरोप लगाकर कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। मामले में सुनवाई के लिए 30 अप्रैल नियत की गई है।
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार शर्मा की ओर से यह याचिका सीजेएम न्यायालय में दायर की गई है, जिसमें देहली गेट के नगला मेहताब की रहने वाली रचना की ओर से कहा गया है कि उसके 40 वर्षीय पति जितेंद्र कुमार नगर निगम में संविदा पर सफाई कर्मी थे। पांच अप्रैल 2021 की शाम को घर पर खाना खाने के बाद जितेंद्र को बेचैनी महसूस हुई तो उन्हें परिजन रात 11 बजे दीनदयाल अस्पताल ले गए।
जहां डाक्टरों ने जांच के बिना जितेंद्र को कोरोना संक्रमित बताकर भर्ती कर लिया और परिवार को घर भेज दिया। इसके कुछ घंटे बाद रचना को फोन पर यह सूचना दी गई कि जितेंद्र की मौत हो गई है। इस पर परिजन वापस अस्पताल आए।
मगर कोविड प्रोटोकॉल का हवाला देकर किसी को शव देखने नहीं दिया और छह अप्रैल को जितेंद्र के शव को एंबुलेंस में आईटीआई रोड स्थित श्मशान गृह ले जाकर कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार करा दिया। इस दौरान सिर्फ चार-पांच रिश्तेदारों को ही अंदर बुलाया गया। यहां भी आनन-फानन अंतिम संस्कार के बाद सभी को वापस भेज दिया गया। बाद में परिवार को रिपोर्ट दी गई कि जितेंद्र निगेटिव था।
इस पर रचना का आरोप है कि पति को कोरोनाग्रस्त दिखाकर उनके अंगों को गैरकानूनी ढंग से निकाल तो नहीं लिया गया। साथ में लापरवाही के चलते उसे उसके पति का अंतिम बार मुंह तक नहीं देखने दिया गया। इस मामले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के मुख्य चिकित्साधिकारी व ऑन ड्यूटी चिकित्सक व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया है। अधिवक्ता के अनुसार मामले में 30 अप्रैल तारीख नियत की गई है।
हर दिन हो रहा यह काम
इधर, अगर आईटीआई रोड श्मशान गृह में चल रही अंतिम संस्कार प्रक्रिया पर गौर करें तो यहां हर दिन यही काम चल रहा है। जो भी शव आ रहे हैं, उन्हें निगेटिव बताया जा रहा है। मगर उनका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही कराया जा रहा है।