गांव गुरुसिखरन क्षेत्र की जिस भूमि को एनजीटी कोर्ट ने जंगल घोषित कर दिया था। अब रिवीजन दायर करने के बाद इसी कोर्ट ने प्रदेश सरकार को वहां विकास के काम कराने की छूट दे दी है। इस निर्णय की जानकारी यहां सेंटर प्वाइंट के निकट होटल में अमेठी-गुरुसिखरन क्षेत्र विकास समिति के पदाधिकारियोें व कुछ ग्राम प्रधानों ने दी है।
समिति के अध्यक्ष अर्जुन भोलू सिंह, बरकातपुर के प्रधान सत्येंद्र पाल सिंह, मनोज कुमार, राजू चौहान, राकेश कुुमार, पूनम चौहान सहित अन्य प्रधानों ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरुसिखरन क्षेत्र में 628 एकड़ जमीन गुरुसिखरन, हरदुआ देहात, महुआ खेडे़ की सीमा में आती है। इसमें पचास साल से सीडीएफ द्वारा पशुपालन व किसान कल्याण कार्यक्रम होते थे।
इन्हें वर्ष 1996 में समाप्त कर दिया गया। बाद में वर्ष 2012 में प्रदेश सरकार ने स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की घोषणा की थी। तब इस भूमि का उपयोग करने पर विचार बना था। इसके अलावा एडीए ने आवासीय कॉलोनी और आरएएफ ने भी इस भूमि को अधिग्रहित कर इसका इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।
इससे इलाके में काफी विकास होता। लेकिन इसी दौरान इस सीडीएफ की भूमि के मामले को एनजीटी कोर्ट में ले जाकर इसे जंगल घोषित करा दिया गया। उक्त लोगोें ने पत्रकार वार्ता में बताया कि उसके बाद एनजीटी कोर्ट में रिवीजन दायर किया गया। वहां कोर्ट को पूरे तथ्य बताए गए।
अब कोर्ट ने अपने दूसरे आदेश में कहा है कि राज्य सरकार चाहे तो इस भूमि में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी अथवा अन्य विकास के काम कर सकती है। उक्त लोगों ने बताया कि अब सरकार इस पर अंतिम फैसला लेगी। या तो विकास के काम कराएगी या फिर वन विभाग को जमीन सौंप देगी।