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अलीगढ़: ये लापरवाही की इंतहा है... तो कोरोना को ऐसे ही हराना है

Fri, 19 Mar 2021 07:47 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
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कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala
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साल पूरा होते-होते कोरोना की दूसरी लहर जोर पकड़ रही है। हर स्तर पर चिंता दिखाई दे रही है। खुद प्रधानमंत्री ने चिंता जताई है। मगर, स्वास्थ्य महकमे का आलम यह है कि बिना कोरोना के ही लोगों को डरा दे रहा है। ये लापरवाही है या जानबूझकर की जा रही कोई साजिश, यह तो जांच में ही स्पष्ट होगा? मगर इतना जरूर है कि इस तरह की गड़बड़ी किसी दिन किसी बड़ी फजीहत को दावत न दे दे? आलम यह है कि लोगों को बिना कोविशील्ड लगे ही मोबाइल पर उनके कोविड-19 का टीका लगने के संदेश मिल रहे हैं तो किसी को बिना जांच के ही जांच रिपोर्ट मिल जा रही है। हालांकि, सीएमओ इसे फीडिंग के दौरान हुई मानवीय भूल करार दे रहे हैं।
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केस 1: बिना कोविशील्ड लगवाए मिला संदेश
लोगों के पास मोबाइल पर इस तरह के संदेश आ रहे हैं। डीयर, मिस्टर वर्मा, आपको कोविशील्ड की दूसरी डोज सफलतापूर्वक लग चुकी है। आप महकमे की वेबसाइट से अपना प्रमाणपत्र डाउनलोड कर सकते हैं। इसमें सबसे अहम बात है कि जिन सज्जन को यह संदेश आया है वे अभी तक न तो कोविशील्ड लगवाने गए और न लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। ऐसे में ये सज्जन हैरान हैं कि अगर वे टीका लगवाने जाएंगे तो कहीं उनके सामने यह सवाल खड़ा तो नहीं होगा कि उनको तो टीका रिकार्ड में लग चुका है। हां, यहां तथ्य जरूरी है कि उनके मोबाइल पर जो संदेश आया है, उसमें नाम किसी अन्य का उल्लिखित है।

केस 2;  जांच कराई मार्च में रिपोर्ट मिली सितंबर की
लापरवाही का यह दूसरा उदाहरण है। शहर के क्वार्सी इलाके से एक व्यक्ति ने लखनऊ जाने से पहले 6 मार्च 2021 को अपनी आरटीपीसीआर जांच दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में कराई। जब उन्होंने जांच रिपोर्ट ऑनलाइन डाउनलोड की तो पता चला कि उनकी एंटीजन जांच 19 सितंबर 2020 को हुई थी, जो निगेटिव है। हैरानी की बात है कि 19 सितंबर को यह सज्जन यहां थे ही नहीं। वे लखनऊ में थे और उस समय वे यहां जांच कराने भी नहीं गए थे। उस जांच रिपोर्ट पर उनका पता समद रोड लिखा हुआ था। बाकी जानकारी सही है। हालांकि, 6 मार्च की जांच रिपोर्ट जब उन्हें ऑनलाइन नहीं मिली तो उन्होंने हार्ड प्रति अस्पताल से प्राप्त कर ली। मगर सवाल है कि उनकी पुरानी जांच किस आधार पर अपलोड थी।
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यह मानवीय भूल है। किसी टीकाकरण कराने वाले व्यक्ति का मोबाइल नंबर गलत फीड हो गया होगा। इसी वजह से मैसेज गलत आदमी तक पहुंच गया होगा। एक मोबाइल नंबर पर चार लोग रजिस्टर हो सकते हैं। इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं कि अब उनको टीका नहीं लग पाएगा। साथ में टीका लगवाने के समय आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र दिखाना होगा। ऐसे ही मिस फीडिंग गलत जांच रिपोर्ट अपलोड होने में हुई होगी। -डॉ.बीपी कल्याणी, सीएमओ

इन लोगों को नहीं लग सकता टीका
सीएमओ बताते हैं कि गर्भवती महिला, बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिला, अनियंत्रित बीपी या शुगर के मरीज या फिर दिल के रोगी, जिन्हें खून पतला करने की दवा दी जाती है। आम धारणा है कि कोविशील्ड दवा कभी कभी विशेष परिस्थितियों में खून का थक्का जमा देती है। यही कारण है इस तरह के मरीजों को टीका नहीं लगाया जाता। जब भी कोई टीका लगवाने आता है तो उससे बीमारी के बारे में पूछा जाता है। शक होने पर कोविड जांच होती है। 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को और 45 से 59 वर्ष तक के बीमार को बीमारी नियंत्रित होने पर टीके लगवाए जा रहे हैं।
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