कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने के बाद हृदय और फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग में अभी भी सिलिंडर से आपूर्ति की जाने वाली ऑक्सीजन का इंतजार है।
इससे कहीं न कहीं किसी हद तक मरीजों का उपचार भी प्रभावित हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि हम किसी तरह काम चला रहे हैं, लेकिन हमें पर्याप्त संसाधन मिलेंगे तो हम मरीजों का बेहतर उपचार कर पाएंगे।
फेफड़े और हार्ट का आपस में क्या संबंध है
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र और देश के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक सेठ अपने एक साक्षात्कार में बताते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण से फेफड़े बुरी तरह प्रभावित होते हैं। फेफड़ों के माध्यम से ऑक्सीजन हृदय तक पहुंचती है।
हृदय रक्त को सभी अंगों तक पहुंचाने का काम करता है। अगर हृदय तक ऑक्सीजन की मात्रा कम पहुंचे तो उसे अतिरिक्त प्रयास करने होते हैं। जिससे हृदय संबंधी परेशानियां पैदा होनी शुरू हो जाती हैं। डॉ. सेठ कहते हैं कि 80 फ़ीसदी मरीज घर पर ही सामान्य उपचार के बाद सही हो जाते हैं। किसी भी तरह की समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श बहुत आवश्यक है।
ब्लैक फंगस का कोई भी पुष्ट मामला जेएन मेडिकल कॉलेज में नहीं
ब्लैक फंगस का कोई भी मामला जेएन मेडिकल कॉलेज में नहीं है। कुछ मामले ऐसे जरूर बताए गए हैं, जिनमें कुछ समय पहले मेडिकल कॉलेज से स्वस्थ हो कर गए मरीज को कुछ समस्या आने की बात कही जा रही है, लेकिन यह कौन लोग हैं और कहां के हैं यह कोई भी रिपोर्ट नहीं कर रहा है। प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि अभी तक मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस का कोई भी कंफर्म मामला नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में हम अभी भी हमारे प्लांट के माध्यम से लिक्विड ऑक्सीजन को गैस में बदलकर आपूर्ति कर रहे हैं, सिलिंडर से दी जाने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई अभी नहीं हुई है जो मरीज कार्डियोलॉजी यूनिट में ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले थे उनको दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। उन्हें पूरा उपचार मिल रहा है। उम्मीद है जल्द ही आपूर्ति मिलेगी। - प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी, प्रिंसिपल जेएन मेडिकल कॉलेज