अलीगढ़ नगर निगम के मेयर की कुर्सी को भाजपा से छीनने के लिए कांग्रेस और सपा में स्थानीय स्तर पर अंदरखाने गठबंधन की बात शुरू हो चुकी है। दोनों पार्टियों के स्थानीय नेता जोड़तोड़ कर 22 साल से मेयर की कुर्सी पर काबिज भाजपा को हराना चाहते हैं। हालांकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर निकाय चुनाव अकेले ही लड़ने की बात कह रहे हैं।
सपा ने भी अब तक इस संबंध में कोई ऐलान नहीं किया है कि गठबंधन होगा या नहीं। फिर भी स्थानीय नेताओं की मानें तो दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व को इस बात के लिए राजी किया जा सकता है कि अगर एकजुटता से लड़े तो भाजपा को शिकस्त दी जा सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोर पकड़ गई है कि अगर पार्टी नेतृत्व नहीं माना तो स्थानीय नेता अपने स्तर से एकजुटता की रणनीति बनाकर भाजपा को हराने में पूरी ताकत झोंक सकते हैं। बहरहाल, बीते फरवरी महीने में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा का गठबंधन था। लेकिन कोल विधानसभा सीट से कांग्रेस के विवेक बंसल और सपा से अज्जू इसहाक आमने-सामने चुनाव लड़े थे। नतीजा ये रहा कि भाजपा के अनिल पाराशर जीत गए। इस चुनाव में अलीगढ़ की सभी सात सीटों पर भाजपा जीती थी।
गुफ्तगू ने किया गठबंधन का इशारा
1- बीते 15 अक्तूबर को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के जन्म शताब्दी समारोह में अलीगढ़ आए कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री एवं जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि निकाय चुनाव पर पार्टी अपने दम पर जीत हासिल करेगी। उन्होंने निकाय चुनाव में गठबंधन से इंकार किया था। लेकिन मंच पर सपा के पूर्व विधायक जफर आलम की मौजूदगी और राज बब्बर से उनकी गुफ्तगू के बाद चर्चा है कि सपा और कांग्रेस में तालमेल हो सकता है।
2- समारोह में मौजूद राज बब्बर ने कहा था कि अलीगढ़ वालों एक ऐसा ताला बनाओ, जिसमें डर और खौफ को बंद कर उसकी चाबी दक्षिण अफ्रीका के जंगलों में फेंक दी जाए। उस वक्त मंच पर शहर सीट से सपा के पूर्व विधायक एवं लिंक लॉक्स के संस्थापक जफर आलम मौजूद थे। बाद में जफर आलम ने भी एकजुट होकर साथ खड़े होने पर जोर दिया।
3- इसी समारोह में मौजूद मशहूर इतिहासकार इरफान हबीब ने भी कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द के हिमायती एकजुट हों। उन्होंने कहा कि केवल 33 फीसदी वोट से भाजपा जीती है। इसलिए अगर बाकी लोग एकजुट हों, तो भाजपा को हराया जा सकता है।
अभी तक दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है। हां, अगर परिस्थिति बनी और स्थानीय स्तर पर भाजपा को हराने के लिए दोनों दलों के बीच ठोस रणनीति तय हुई तो कांग्रेस सपा के साथ एकजुट होकर चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती है।
- विवेक बंसल, राष्ट्रीय सचिव कांग्रेस
कांग्रेस नेतृत्व ने निकाय चुनाव में सपा के साथ गठबंधन पर अब तक कोई फैसला नहीं किया है। शीर्ष नेताओं ने अकेले ही निकाय चुनाव लड़ने की बात कही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर हम सब लोग एकराय हुए तो कांग्रेस सपा के साथ मिल कर किसी एक मजबूत प्रत्याशी को मेयर पद का चुनाव लड़ा सकती है। इसको लेकर पार्टी नेतृत्व से भी बात की जाएगी। भाजपा को मेयर पद पर हराना ही एकमात्र लक्ष्य है।
- चौ. विजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद
निकाय चुनाव में नगर निगम अलीगढ़ मेयर पद को लेकर सभी गैर भाजपाई एक-दूसरे के संपर्क में हैं। भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों और फरमानों से आम जनता परेशान है। ऐसे में अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का निर्देश हुआ तो कांग्रेस के साथ गठबंधन हो सकता है। अन्यथा की सूरत में सपा अपना चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।
- अशोक यादव, जिलाध्यक्ष सपा
मैं नुमाइश मैदान में कांग्रेस के आयोजन में गया था। वहां मैंने अपनी बात रखी कि स्वच्छता संदेश फैलाने वालों को दिल की गंदगी भी साफ करनी चाहिए। निकाय चुनाव में मैंने सपा से मेयर का टिकट मांगा है। मौका मिला तो चुनाव लडूंगा। गठबंधन होने या न होने का फैसला शीर्ष नेतृत्व को करना है। स्थानीय स्तर पर दोनों पार्टियों के नेताओं में एकजुट होने की बातचीत जरूर हो रही है।
- जफर आलम, पूर्व शहर विधायक सपा