पंचायत चुनाव में कांग्रेस अपनी उपलब्धि और भूमिका को तलाशने में जुटी है, क्योंकि कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। इसको लेकर पार्टी के नेताओं पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। जिला पंचायत सदस्य पद पर 47 सीटों में से 24 पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी खड़े किए थे। एक भी सीट पर कांग्रेस का प्रत्याशी विजय हासिल नहीं कर सका है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अलीगढ़ पर्यवेक्षक अवनीश राघव को लिखे पत्र में यूपी कांग्रेस जोन टू के पूर्व प्रवक्ता इरशाद सलीम ने कहा कि जिला पंचायत चुनाव में हार के लिए मौजूदा कुछ पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। इन्होंने प्रचार समिति में शहर के कुछ चुने हुए लोगों को लिया लेकिन पार्टी के जुझारू संघर्षशील और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की।
पत्र में कहा है कि जनपद में संगठन नाम की चीज नहीं है। ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत क्षेत्र पंचायत ब्लॉक स्तर पर और बूथ स्तर पर संगठन बंजर हो चुका है। बुजुर्ग कांग्रेसी नेता राजेंद्र मेहरा इस स्थिति के लिए पार्टी के ड्राइंग रूम कल्चर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वह कहते हैं कि कांग्रेस में जो इस समय सक्रिय लोग हैं, उनकी संख्या बहुत कम है।
पार्टी जमीनी स्तर पर बहुत कमजोर है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि पार्टी के सभी प्रत्याशियों ने मजबूती के साथ चुनाव लड़ा है। चुनाव में परिस्थितियां दूसरी थीं। जिसके चलते उसका प्रभाव पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा है।