कमरे में पड़ा फर्नीचर और उसी में चल रहा स्कूल का कार्यालय
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पंखे लगे, बिजली नहीं
गर्मी से बचाव के लिए कमरे में पंखे लगाए गए हैं, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं होने से उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। खुले में बैठने वाले बच्चों को गर्मी और उमस के बीच पढ़ना पड़ता है। बारिश के दौरान परिसर में जलभराव होने से स्थिति और खराब हो जाती है।
विभाग को कई बार दी जानकारी
प्राचार्या सोनी माहेश्वरी ने बताया कि भवन में जगह कम होने के कारण बच्चों को बाहर बैठाना पड़ता है। इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में है। नए कमरे बनने के बाद बच्चों के बैठने की समस्या दूर हो जाएगी।
निरीक्षण कराएंगे, लेकिन सवाल कई
194 बच्चों की मौजूदा स्थिति के बारे में बीएसए आलोक सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्कूल का जल्द निरीक्षण कराया जाएगा और व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जब 194 बच्चों के लिए सिर्फ एक कमरा है तो अब तक अतिरिक्त कक्ष की व्यवस्था क्यों नहीं हुई? भवन की जरूरत को लेकर प्रस्ताव भेजे जाने के बाद वह किस स्तर पर अटका है? पंखे लगाए जाने के बावजूद बिजली कनेक्शन अब तक क्यों नहीं कराया गया? और बारिश में पढ़ाई प्रभावित होने की जानकारी होने के बाद बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का अभियान चल रहा है, तब जिला मुख्यालय से महज 13 किलोमीटर दूर इस स्कूल के 194 बच्चों को अब भी खुले में पढ़ने की मजबूरी क्यों है?