आधी रात ऐसे बंद रहते हैं वार्ड
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21 अगस्त की रात संवाददाता ने मरीजों की इस तालाबंदी को कैमरे में कैद किया। सवाल उठा कि जब मरीज खुद को बंद कर लेते हैं तो फिर सुरक्षा गार्ड कहां ड्यूटी देते हैं? बहरहाल 30 मिनट बाद रात 1.20 मिनट पर उसे इस सवाल का जवाब मिला, जब इमरजेंसी वार्ड खाली पड़े तीन बेड पर सुरक्षा गार्ड सो रहे थे। एसी की ठंडक के बावजूद इनके पास एक पंखे का इंतजाम भी था। सबको नींद लेने का अवसर मिले, इसलिए उन्होंने सोने की रोटेशन ड्यूटी लगाई है। रात तकरीबन 2.30 बजे तक पूरा अस्पताल गहरी नींद में था। यानी हर कमरा अंदर से बंद मिला। एक वार्ड में लगी जाली से झांकते हुए भी तस्वीर कैद हुई जिसमें नर्सिंग स्टाफ का कक्ष वार्ड के अंदर था और पता चला कि कुंडी या ताला लगने के बाद वे भी अपने कक्ष को बंद कर लेते हैं।
अगले दिन जब सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा से सवाल पूछे गए तो उन्होंने जवाब दिया कि रात भर नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा गार्ड मुस्तैद रहते हैं। उनके अस्पताल में सुरक्षा से समझौता नहीं है। जब उन्हें तस्वीरें दिखाई गईं तो एक पल वे ठहरे फिर बोले कि सोते हुए मिलने पर गार्ड को हटाया दिया जाएगा। वे इस मसले की जांच करेंगे।
महिला सर्जरी वार्ड के दरवाजे पर लगी जाली से ली गई तस्वीर
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बाहर से कुंडी बंद, भीतर झांको तो चौकी चालू
हैरानी सिर्फ वार्ड तक सीमित नहीं है। जिला अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी भी है। जब सभी वार्ड अंदर से बंद हो जाते हैं तो पुलिस भी चौकी में दिखाई नहीं देती। पड़ताल में संवाददाता ने पाया कि बाहर चौकी की कुंडी लगी है और भीतर झांकने पर देखा कि लाइट जली है, लेकिन कुर्सियां खाली पड़ी हैं। चौकी के दरवाजे पर दो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अगले दिन सिपाही मिला जो बोला कि कुछ रहता है तो कैमरे में देख लेते हैं।
तस्वीरों के पीछे की तस्वीर
मरीजों को अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। इसलिए वे खुद को बंद करने पर सहमत हो जाते हैं। सुरक्षा गार्ड भी नहीं चाहते कि उनका भरोसा बने, क्योंकि अगर ऐसा होगा तो उन्हें रात भर जागना पड़ेगा। पुलिस भी यह मान चुकी है कि चोरी होती रहेगीं। अच्छा यही रहेगा कि मरीज अपनी सुरक्षा स्वयं करे।