पश्चिमी यूपी के जाटलैंड के आखिरी छोर पर आने वाले टप्पल, खैर, इगलास, मुरसान,सादाबाद, खंदौली के बीच मुरसान जाटों की इकलौती रियासत थी। जिसका किला जिलाधिकारी हाथरस का आवास रहा है। मुरसान और इगलास के बीच 13 किमी है। जब मुरसान अलीगढ़ जिले का हिस्सा हुआ करता था तो लोगों के बीच सामाजिक और व्यापारिक रिश्ते हुआ करते थे।
अब जिला अलग होने के कारण वह बात नहीं रही। मगर मुरसान राजा का अपने जिला मुख्यालय अलीगढ़ से खासा लगाव था। यहां उनके द्वारा दान में दी गई जमीन पर एएमयू बनी और शहर में भी तमाम जमीनें बसावट में काम आईं। इसी बीच जब 1951 में यूपी विधानसभा का पहला चुनाव हुआ तो उनके परिवार के वंशज राजा बहादुर किशोरी रमण सिंह निर्दल प्रत्याशी के रूप में यहां चुनाव लड़े, मगर इगलास के कद्दावर जाट नेता शिवदान सिंह से चुनाव हार गए।
दूसरी बार के प्रयास में 1957 में राजा रमण सिंह चुनाव जीते। हालांकि खुद राजा महेंद्र प्रताप अलीगढ़ संसदीय सीट से भी चुनाव लड़े थे, मगर हार गए थे।
मुरसान राजा परिवार के चुनाव से हटने के बाद यह सीट क्षेत्र के कद्दावर जाट नेता शिवदान सिंह के प्रभुत्व में आई। इसी बीच जाट बाहुल्य होने के कारण देश के बड़े जाट नेता चौ. चरण सिंह ने इस सीट पर अपनी पत्नी गायत्री देवी को यहां से विधायक चुनाव जिताया। बाद में उनकी बेटी ज्ञानवती भी यहां से चुनाव जीतीं। इसी बीच शिवदान सिंह के बेटे राजेंद्र सिंह के चरण सिंह से बेहतर रिश्ते हुए और चरण सिंह ने उन्हें अपनी राजनीतिक विरासत सौंप दी।
दोनों कद्दावर जाट नेताओं के एक होने के कारण लगातार चार बार राजेंद्र सिंह यहां से विधायक बने। इसके बाद भी यहां जाट नेताओं का ही प्रभुत्व रहा। जिसमें चरण सिंह के बेटे अजित सिंह का प्रभुत्व भी काम आया है। अब 2012 से सीट के एससी आरक्षित होने के बाद भी यह राजनीतिक समीकरण बने हुए हैं कि जाट जिस करवट बैठें, उसी करवट जीत बैठती है।
इगलास सीट पर तीसरी बार उपचुनाव होने जा रहा है। पहला उपचुनाव 1959 में हुआ था। यहां 1957 में जीते विधायक राजा रमण सिंह थे। मगर उन पर एक सांप्रदायिक पर्चे बांटने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अदालत में सिविल शूट दायर हुआ था, जिसके चलते उनकी विधायकी गई थी। जिसके चलते उपचुनाव हुआ और क्षेत्र के ही लीडर लक्ष्मी सिंह निर्दल प्रत्याशी के रूप में विधायक बने।
इसके बाद दूसरी बार उपचुनाव 2004 में हुआ। यहां के तत्कालीन विधायक चौ. विजेंद्र सिंह अलीगढ़ सीट से सांसद हो गए और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। इसके चलते यहां उपचुनाव में बसपा के मुकुल उपाध्याय चुनाव जीते। इसी तरह अब विधायक राजवीर दिलेर के सांसद बनने पर उपचुनाव होने जा रहा है।
पिछले चार चुनावों में बसपा आगे
जाट बाहुल्य इस सीट पर पिछले चार चुनाव में बसपा हर लड़ाई में आगे रही है। 2002, 2007,2012 और 2017 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे हैं। वहीं 2004 के उपचुनाव में बसपा के मुकुल उपाध्याय चुनाव भी जीते हैं।