आशीष निगम, अलीगढ़।
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बृहस्पतिवार को अलीगढ़ आ रहे हैं। वह बृज मंडल के दौरे पर अलीगढ़, मथुरा होते हुए आगरा पहुंचेंगे। सुबह अलीगढ़, दोपहर में मथुरा और शाम को आगरा में होंगे। कोरोना के लगभग सवा साल लंबे संक्रमण काल में मुख्यमंत्री योगी पहली बार जिले का दौरा करेंगे। इसकी खास वजह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में हुई दर्जनों मौतों को माना जा रहा है, जिसके बाद से कोरोना के अलीगढ़ स्ट्रेन के विकसित होने को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है।
विवि इंतजामिया ने देश के शीर्ष मेडिकल संस्थानों से संपर्क किया है ताकि ये पुख्ता हो सके कि वाकई में कोरोना वायरस के अलीगढ़ स्ट्रेन नाम की कोई चीज है या नहीं..? सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक दिन पहले ही एएमयू के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से फोन पर पूरा हाल जाना है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के अनुसार, वह एएमयू, कलक्ट्रेट के कंट्रोल रूम का निरीक्षण करने के बाद पहले मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और उसके बाद एएमयू में बैठक करेंगे। इन बैठकों में जिले में कोरोना के नए स्ट्रेन के संक्रमण को फैलने से रोकने की रणनीति बनेगी। मुख्यमंत्री के आने से अलीगढ़ में कोरोना को नियंत्रित करने में हो रही कई खामियों के दूर होने की उम्मीद जगी है, क्योंकि अगर उन्होंने समस्याएं खुद ही देख लीं तो समाधान में अड़चन नहीं रह जाएगी।
इधर, जिले में ऑक्सीजन को लेकर लगातार हायतौब्बा मची हुई है। सरकारी कोविड अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों को तो ऑक्सीजन किसी तरह से मिल जा रही है, दूसरी गंभीर बीमारी से ग्रस्त और कोरोना के होम आइसोलेशन वाले मरीज बेहद परेशान है। उनको एक-एक सिलिंडर 2000 रुपये तक ब्लैक में मिल रहा है, जिसकी कीमत 500 रुपये तक है।
कासिमपुर स्थित राधिका गैस प्लांट में अलीगढ़ के भाजपा सांसद सतीश गौतम, प्लांट संचालक और कलक्ट्रेट कर्मी पर ऑक्सीजन वितरण में मनमानी करने के बेहद गंभीर आरोप लगे। मामला सुर्खियों में छाया तो जांच शुरू हो गई, जो अब तक जारी है। एसडीएम कोल रंजीत सिंह जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक कब होगी कुछ पता नहीं है।
इसी तरह से बीती 22 अप्रैल को भाजपा बृज प्रांत के नेता इंजी राजीव शर्मा के भाई डा. संजीव शर्मा के अस्पताल एसजेडी सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल में पांच लोगों की आक्सीजन की कमी से मौत हो गई है। जब जांच शुरू हुई तो डा. संजीव शर्मा बयान देने ही नहीं आए। प्रशासन भी उन पर दबाव नहीं बन पाया।
हां, जिनके परिजन मरे वो जरूर परेशान हैं, क्योंकि उन पर सत्ता की हनक दिखा कर दबाव बनाया जा रहा है। ये केवल दो उदाहरण है, जिसमें ये पता चलता है कि सत्ता पक्ष के लोग ही व्यवस्था को मन चाहे तरीकों से चला रहे हैं और किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
अगर सरकार चलाने वाले ही सवालों के घेरे में हो तो क्या व्यवस्था बनेगी..? इसका इसका सीएम को भी लगाना होगा। इधर, बीते दो दिनों से जो व्यापारी आक्सीजन कन्संट्रेटर से लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना चाहते हैं, वह चाह कर भी मदद नहीं कर पा रहे हैं।
अलीगढ़ में कोरोना के बढ़ते संक्रमण और उससे हुई मौतों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल से 12 मई तक अकेले नुमाइश मैदान स्थित कोविड डेडिकेटेड श्मशान गृह में कोरोना संक्रमित या संदिग्ध लगभग 500 शवों का अंतिम संस्कार किया गया है।
अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ा। यही नहीं, जिले के कई स्थानों पर ऐसे संक्रमित या संदिग्धों के शव जलाए और दफनाए गए हैं। ये अलग बात है कि सरकारी आंकड़ों में इन मौतों का सैकड़ा तक पूरा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री का ये दौरा संकट के समय में उठाया गया जरूरी कदम जरूर है, हां इंतजार इसका भी रहेगा कि उनके आने का जमीन पर कोई असर हुआ या नहीं..?
ये है अलीगढ़ का हाल
1- एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में लगातार मौतों पर नए स्ट्रेन की चर्चा, रिपोर्ट का इंतजार।
2- ऑक्सीजन की कालाबाजारी के मामले में अब तक जांच-पड़ताल का खेल, नतीजा कुछ नहीं।
3- एसजेडी हॉस्पिटल में पांच कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन की कमी से मौत के मामले में जांच पूरी नहीं।
4- कोरोना कर्फ्यू का उल्लंघन कर रहे नेता और उनके गुर्गे, विपक्षी भी बेकाबू, किसी पर कार्रवाई नहीं।
5- थोक बाजार दस दिन बंद रहने से खाद्य पदार्थ हुए महंगे, पुलिस की दबंगई में दुकानें बंद रहीं।
6- कोरोना में इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल उपकरण, दवाएं और आक्सीजन कन्संट्रेटरों की जबरदस्त किल्लत।
7- 01 अप्रैल से 12 मई तक कोरोना संक्रमित या संदिग्ध 500 मृतकों का संस्कार कोविड श्मशान गृह में।
8- कोविड हॉस्पिटल में डॉक्टर मरीजों को नहीं देखते, बार्ड ब्वाय, नर्स और दूसरे स्टाफ का ही सहारा बचा।
9- अस्पतालों में खाली बेड, ऑक्सीजन और मरीजों के बारे में जानकारी नहीं है, तीमारदार परेशान।
10- मरीजों के बारे तीमारदारों को सूचना नहीं मिलती, दस दिन तक अस्पतालों में पड़े रहते हैं शव।
11- कोरोना संक्रमित या कोरोना संदिग्ध मरीजों की मौत पर ऑडिट का निर्देश कागजों में, कुछ नहीं हुआ।
12- कोरोना संदिग्ध बता कर हो रही मौतों के कारण शहर से देहात तक संक्रमण बहुत तेजी से फैला।
13- शहर से लेकर देहात तक कोरोना मरीजों की पहचान और उसके बाद कांट्रेक्ट ट्रेसिंग बहुत सुस्त।
14- टीकाकरण कराने के लिए अस्पतालों को वैक्सीन नहीं मिल रही, लोग बेसब्री से कर रहे इंतजार।
15- कोरोना इलाज में कारगर प्लाज्मा थेरेपी पर कोई ठोस पहल नहीं हुई, केवल बातें ही हो रहीं।
प्रशासन हुआ सक्रिय
1- डीएम ने अधीनस्थों को लापरवाही पर कठोर सजा भुगतने को तैयार रहने के लिए कहा
2- मंडलायुक्त ने कोरोना कंट्रोल रूम कलक्ट्रेट का निरीक्षण किया, अस्पतालों में तैयारी
3- दवा, किराना, सब्जी और दूध की दुकानों से होम डिलीवरी के नंबर जारी किए गए
सरकारी आंकड़ों कोरोना का ग्राफ
अब तक कुल 19357 संक्रमित
अब ठीक हुए कुल लोग 16178
जिले में वर्तमान में सक्रिय केस 3080
अब तक कुल मौतें 99 हुई
नोट ऱ् 11 मई तक का ब्योरा