दीपक शर्मा, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आना कई मायनों में अहम रहा। 33 साल बाद प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री एएमयू में आया था। इससे भी ज्यादा भारतीय जनता पार्टी की सरकार का कोई मुख्यमंत्री अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आया था।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी कट्टर छवि के विपरीत छवि प्रस्तुत की। एएमयू में अपने संबोधन में उन्होंने अलीग बिरादरी को संदेश देते हुए सामूहिक प्रयास, महामारी नियंत्रण के लिए मिल जुल कर उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया और एएमयू से मिले प्रस्तावों पर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
विगत वर्षों में यही होता आया है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुछ छात्र नेताओं द्वारा और कुछ पूर्व छात्रों द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उनकी नीतियों को लेकर आलोचना की जाती रही। कभी उनके बयानों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए तो कभी उनके द्वारा लिए गए फैसलों को लेकर विरोध देखा गया।
लेकिन 13 मई 2021 का दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए भी बेहद अहम इसलिए रहा कि एएमयू ने अपने दरवाजे योगी आदित्यनाथ के लिए खोले थे। भले ही इसके लिए परिस्थितियां और महामारी के कारण बने हालात जिम्मेदार रहे हैं।
कोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनिल पाराशर कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आप हमारे जनप्रतिनिधियों का सहयोग करें, केंद्र और राज्य सरकार विश्वविद्यालय का जो भी संभव होगा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री ने जेएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा उपकरणों के विस्तार का भरोसा दिया है। ऑक्सीजन की उपलब्धता का भरोसा दिया है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज की भी महामारी नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही मुख्यमंत्री ने ऐसे तत्वों की बात को भी नकार दिया, जो लगातार जेएन मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय को आलोचना के घेरे में रख रहे थे।
विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर नजर रखने वाले कहते हैं कि अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री का यह विश्वविद्यालय में आगमन भविष्य में किस प्रकार की गतिविधियों और घटनाक्रमों का जन्मदाता बनता है।
वे रूढ़िवादी लोग नहीं हो सकते एएमयू के शुभचिंतक
एएमयू में मुख्यमंत्री ने उन लोगों को निशाने पर लिया जिन्होंने एएमयू प्रोफेसरों की मौत के तथ्य को तोड़ मरोड़ कर सोशल मीडिया पर पेश किया। उन्होंने कहा कि समीक्षा बैठक में खुद कुलपति ने स्वीकारा कि जिन लोगों की कोरोना से मौत हुई, उन्होंने कोविड का टीका नहीं लगवाया था। साथ में मृत्यु संख्या भी बढ़ा चढ़ाकर पेश की गई। ऐसे रूढ़िवादी लोग एएमयू के शुभ चिंतक नहीं हो सकते।
कुलपति ने जो कहा, उस पर शुभ संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बृहस्पतिवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) आए थे। इस बात की जानकारी खुद योगी ने जेएन मेडिकल कॉलेज के सभागार में अपने संबोधन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कुलपति उनसे पिछले दो दिन से संपर्क में हैं।
लगातार बात हो रही हैं। इससे के अलावा वे केंद्र में भी संपर्क में हैं। पीएम की सलाह व दो दिन से हो रही बातचीत के बाद ही एएमयू आना तय किया गया। यहां की छवि गलत तरीके से पेश की गई थी। मगर ऐसा नहीं है। खुद कुलपति ने बताया है। एएमयू की हर संभव मदद की जाएगी।
ये मिला मदद का भरोसा
मुख्यमंत्री ने जेएन मेडिकल कॉलेज को आवश्यक ऑक्सीजन आपूर्ति, रेमडेसिविर इंजेक्शन सहित हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस दौरान कुलपति ने ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
तीसरी लहर के लिए और तैयारी जरूरी : कुलपति
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ समर्पण के साथ लगातार काम कर रहे हैं। इनमें से कई मरीजों की सेवा करते हुए संक्रमण ग्रस्त भी हुए हैं। उनके आइसोलेशन पर जाने के बाद स्टाफ की कमी हो गई है।
प्रोफेसर मंसूर ने बताया कि हालांकि हम कोविड की दूसरी लहर पर काबू पाने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन तीसरी लहर से निपटने के लिए भी तैयारी करनी होगी, जिसमें आशंका है कि बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसके लिए बच्चों से संबंधित आईसीयू तथा अन्य मेडिकल व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा।