गंग नगर से निकाले गई सहायक नहरों के किनारे नहर विभाग ने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करवाया था। आम के पेड़ बड़ी संख्या में देखे जाते थे। लेकिन इगलास तहसील इसका अपवाद थी। इसमें आम का एक ही पेड़ था। यह पेड़ सभी स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र था। बबूल के पेड़ों की बहुतायत थी, जो इस इलाके में बड़ी आसानी से उग जाता था। इसके अलावा नीम, गूलर, बेर और जामुन के पेड़ भी ठीकठाक संख्या में उगे हुए थे। 1870 के बंदोबस्त दस्तावेज के अनुसार बागवानी का कुल रकबा 5676 एकड़ था। अगले पांच साल में इसका रकबा बढ़ कर 8871 एकड़ हो गया था, लेकिन यह अलीगढ़ की कुल भूमि के एक फीसदी ( .71 फीसदी)से भी कम था।
पूरी इगलास तहसील में सिर्फ 262 एकड़ में बागवानी हुआ करती थी, जो कुल भूमि का सिर्फ .19 फीसदी था। खैर (.31 फीसदी) और हाथरस (.58 फीसदी) तहसीलों में भी बागवानी की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। प्रशासनिक नीतियों की वजह से बागवानी में इजाफा दर्ज किया गया था। अलीगढ़ में 2003 एकड़ (.88 फीसदी) जमीन बागवानी के अधीन थी। अतरौली की स्थिति 2274 एकड़ (1.04 फीसदी ) के साथ कुछ बेहतर थी। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सिकंदराराऊ में देखी गई थी। 1478 एकड़ के स्थान पर यहां बागवानी का रकबा 2425 एकड़ तक पहुंच गया। यह कुल भूमि का 1.13 फीसदी था।
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