कौशल कुमार ओझा
महानगर के सर सैयदनगर एवं अमीर निशा में वायु गुणवत्ता की जांच करने के लिए वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्र शुरू हो गए हैं। जनवरी माह की रिपोर्ट के अनुसार, शहर की हवा सेहत की दृष्टि से अच्छी नहीं हैं। खासतौर पर सांस के मरीजों के लिए खतरे की घंटी है। इसके अलावा, खराब हवा मानसिक समस्याएं सहित कई तरह की परेशानी पैदा कर रही है।
ज्ञान सरोवर स्थित उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में पहले वायु गुणवत्ता की जांच होती थी। बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अनुबंध हुआ था। इसके तहत एएमयू की ओर से सर सैयद नगर एवं अमीर निशा में वायु गुणवत्ता की जांच के लिए वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर लगी आरडीएस (रेस्पाइरेटरी डस्ट सैंपलर) मशीनों के जरिये वायु की गुणवत्ता जांची जा रही है। एएमयू ने जनवरी की रिपोर्ट तैयार कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेज दी है। जनवरी की रिपोर्ट में पीएम 10 एवं एसपीएम मानक से बहुत अधिक है। फरवरी की रिपोर्ट एक-दो दिन में आने की उम्मीद है।
सर सैयद नगर एवं अमीर निशा में वायु गुणवत्ता जांच के लिए अनुश्रवण केंद्र प्रारंभ हो गए हैं। इस संबंध में एएमयू से अनुबंध हुआ था। एएमयू द्वारा हर महीने रिपोर्ट दी जाएगी। जनवरी की रिपोर्ट में पीएम 10 और एसपीएम मानक से अधिक है। फरवरी की रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है।
- रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
हाथरस में दो केंद्रों का प्रस्ताव भेजा
क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा हाथरस जनपद में वायु गुणवत्ता की जांच के लिए दो केंद्र बनाने का प्रस्ताव बोर्ड के पास गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद काम शुरू हो जाएगा। आगरा रोड स्थित गैलेक्सी होटल एवं सादाबाद में वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्र प्रस्तावित है।
पीएम 10 एवं एसपीएम के बढ़ने से सांस लेने में दिक्कत होती है। अस्थमा एवं एलर्जी के मरीजों की तकलीफ बढ़ जाती है। कई तरह की मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसकी वजह से लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं। डिप्रेशन के भी शिकार होते हैं। वायु प्रदूषण से अन्य कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
- डॉ. भरत वार्ष्णेय, चिकित्सक
जांच केंद्र पीएम 10 एसपीएम
अमीर निशा 152 254
सर सैयदनगर 142 251
नोट- (मानक के अनुसार पीएम 10 व एसपीएम 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए)
धूल बढ़ा रही लोगों की परेशानी
रामघाट रोड, जीटी रोड, आगरा रोड हो या फिर अनूपशहर रोड.... शहर की इन सभी सड़कों पर उड़ने वाली धूल लोगों के परेशानी का सबब बनी हुई है। वाहनों के आवागमन से वातावरण में धूल उड़ने से कभी-कभी बिना चश्मे के वाहन चलाना कठिन हो जाता है। नाक और मुंह में धूल भर जाती है।
अलीगढ़ क्रिटिकल क्षेत्र में
अलीगढ़। करीब एक साल पहले औद्योगिक क्षेत्रों के लिए व्यापक पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक (सीईपीआई) जारी किया गया था। अलीगढ़ में इसका स्कोर 64.42 था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामगोपाल ने बताया कि अलीगढ़ क्रिटिकल क्षेत्र में है। यहां का स्कोर मानक से थोड़ा अधिक है। तालानगरी में वायु प्रदूषण वाले कारखानों को अनुमति नहीं दी जा रही है। निगरानी के लिए अधिकारियों की टीम बनाई गई है।