एएमयू में नागरिकता संशोधन बिल की जलाई गईं सांकेतिक प्रतियां।
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नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में सोमवार रात एएमयू छात्रों ने विश्वविद्यालय कैंटीन पर सभा कर बिल की सांकेतिक प्रतियों को फूंक दिया। छात्र नेताओं ने इसे बंटवारा करने वाला और असंवैधानिक बिल बताते हुए इसकी निंदा की।
सोमवार रात एएमयू छात्र लाइब्रेरी के पीछे कैंटीन पर इकट्ठा हुए। छात्रों ने यहां पर एक सभा की। साथ ही केंद्र सरकार विरोधी नारे लगाए। छात्र नेता फैजुल हसन ने कहा कि जो नागरिकता संशोधन बिल अमित शाह ने संसद में प्रस्तुत किया है, वह वैसा ही है जैसे सन 1947 में देश का बंटवारा हुआ था। भाजपा चाहती है कि फिर से हिंदू और मुसलमानों का बंटवारा हो जाए। यह देश का दुर्भाग्य है कि गृहमंत्री अमित शाह मुसलमानों का नाम नहीं लेकर सीधे सीधे अन्य सभी का नाम ले रहे हैं। इससे साफ है कि गृहमंत्री मुसलमानों के खिलाफ हैं। इसलिए इस बिल को अस्वीकार करते हैं।
एएयमू में छात्रों ने इस बिल की सांकेतिक प्रतियों को जलाया। नारे लगाए गए कि यह देश विरोधी है। संविधान विरोधी है। छात्रों ने कहा कि जिन लोगों ने अखंड भारत का, संवैधानिक समानता का सपना देखा था, बाबा साहेब ने जिस भारत की बुनियाद रखी थी, यह उसके खिलाफ है। राज्यसभा में जो भी विपक्षी पार्टियां हैं, उनसे अपील है कि इसे राज्यसभा में पास नहीं होने दिया जाए। इस बिल के मध्यम से मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने का षड्यंत्र किया जा रहा है। इसके बाद बिल के विरोध में नारेबाजी करते हुए बिल की सांकेतिक प्रतियां जला दीं। इस अवसर पर सैकड़ों छात्र मौजूद थे।
एएमयू में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर विरोध करते छात्र।- फोटो : CITY OFFICE