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Jawaharlal Nehru Medical College: छह माह से नहीं मिला बजट, अटकी 300 बच्चों की हार्ट सर्जरी

Mon, 29 Sep 2025 01:05 PM IST
चमन शर्मा अभिषेक श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

प्रदेश भर से चिह्नित किए जाने वाले बच्चों को ऑपरेशन के लिए यहां भेजा जाता है, यहां उन्हें समय देकर ऑपरेशन किए जाते हैं। मगर यहां बजट के अभाव में मार्च माह से ऑपरेशन बंद पड़े हैं। इसके चलते प्रदेश के अलग अलग जिलों के 300 से अधिक बच्चों के हृदय संबंधी ऑपरेशन रुके पड़े हैं।
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जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) में धन के अभाव में प्रदेश के 300 से अधिक बच्चों की हार्ट सर्जरी अटकी पड़ी है। छह माह से आरबीएसए के जेएन मेडिकल कॉलेज स्थित सेंटर को बजट नहीं मिल पाया है, जिसके चलते दिल की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब-कमजोर वर्ग के बच्चों का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। बजट की कमी का मुद्दा संज्ञान में आने पर मंडलायुक्त ने भी मिशन निदेशक को पत्र लिखकर बजट जारी करने को कहा है।

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आरबीएसके योजना के तहत प्रदेश में ऑपरेशन व गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए तीन केंद्र बनाए हैं, जिनमें जेएन मेडिकल कालेज, पीजीआई नोएडा और केजीएमयू लखनऊ शामिल है। इन केंद्रों में एक से 18 वर्ष तक के प्रदेश भर में चिह्नत गरीब-कमजोर वर्ग के कुपोषित व 38 प्रकार की अपंगता संबंधित बच्चों के गंभीर उपचार व ऑपरेशन की सुविधा है। जेएन मेडिकल कॉलेज में दिल में छेद, हार्ट सर्जरी व स्टेंट डाले जाने संबंधी विशेष ऑपरेशन के अलावा कटे होंठ व तालू संबंधी ऑपरेशन होते हैं। 

प्रदेश भर से चिह्नित किए जाने वाले बच्चों को ऑपरेशन के लिए यहां भेजा जाता है, यहां उन्हें समय देकर ऑपरेशन किए जाते हैं। मगर यहां बजट के अभाव में मार्च माह से ऑपरेशन बंद पड़े हैं। इसके चलते प्रदेश के अलग अलग जिलों के 300 से अधिक बच्चों के हृदय संबंधी ऑपरेशन रुके पड़े हैं। बच्चों व उनके अभिभावकों को इंतजार है कि बजट मिले, ऑपरेशन शुरू हों तो उनकी बारी आए। इधर, प्रदेश भर से अलीगढ़ भेजे जाने वाले गरीब परिवारों के बच्चे बिना ऑपरेशन के यहां से वापस जाने को मजबूर होते हैं। माता-पिता आंसुओं के साथ अपने बच्चों को लेकर मजबूरन वापस चले जाते हैं, यह नहीं जानते कि अपने मासूमों का इलाज कहां करवाएं।

बच्चों की हार्ट सर्जरी न होने की जानकारी पर एनएचएम के मिशन निदेशक को पत्र भेजा गया है। उनसे रैफरल सपोर्ट फॉर सेकेंड्री टरशियर केयर मद के तहत कार्डियक सर्जरी के भुगतान के लिए कहा गया है।-संगीता सिंह, मंडलायुक्त

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आरबीएसके योजना के तहत बजट का अभाव है। इस कारण मेडिकल कालेज में स्टेंट डालने और दिल में छेद की सर्जरी नहीं हो पा रही है। इसके अलावा कुछ सर्जरी जैसे सीएडी आदि नि:शुल्क हो रही हैं।-डॉ. अमित शर्मा, नोडल अधिकारी, आरबीएसके

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अब तक किए 2500 से ज्यादा ऑपरेशन

आरबीएसके के मैनेजर डॉ. मुनाजिर ने बताया कि एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में आरबीएसके के तहत एक साल से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों की हृदय सर्जरी, जैसे दिल के छेद का ऑपरेशन और स्टंट डालना निशुल्क किया जाता है। यहां पर हर दिन करीब दो से तीन बच्चों की सर्जरी होती है। इस केंद्र पर अब तक 2500 से अधिक बच्चों की सफल सर्जरी हो चुकी है। लेकिन एनएचएम से बजट न मिलने और आरबीएसके को स्पर्श पोर्टल पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया के कारण धनराशि फ्रीज हो गई है।

ये तथ्य भी जानें
  • 38 प्रकार की शारीरिक अपंगता-कुपोषण संबंधी बीमारियों के बच्चे होते चिह्नित
  • आरबीएसके द्वारा चिह्नित इन बच्चों का कराया जाता है सरकारी केंद्रों में उपचार
  • प्रदेश में ऑपरेशन के लिए अलीगढ़, नोएडा व लखनऊ में तीन केंद्र बनाए गए
  • अलीगढ़ केंद्र पर हृदय व कटे होठ-तालू के ऑपरेशन की सुविधा सबसे बेहतर
  • जेएन मेडिकल कॉलेज के अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में मार्च से ऑपरेशन का बजट नहीं
  • बजट मिले तो प्रदेश भर से चिह्नित 300 बच्चों के हृदय संबंधी ऑपरेशन शुरू हो सकें
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