अलीगढ़ के 630 परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 25000 बच्चों को पास के स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। इन सभी स्कूलों में बच्चों की संख्या 50 से कम है और हर साल यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या घट रही है। शिक्षा की गुणवत्ता भी यहां बेहतर नहीं है।
अलीगढ़ में 2115 स्कूल हैं। अलीगढ़ में 650 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें छात्र-छात्राओं की संख्या वर्ष 2001 के बाद निरंतर घट रही है। कई जगह तो 20 से 30 के ही बच्चे रह गए हैं। स्कूल चलो अभियान से भी बच्चों की संख्या बढ़ नहीं पा रही है। जबकि शिक्षकों की संख्या बच्चों के अनुपात में ज्यादा है। कई ऐसे स्कूल भी हैं, जहां बच्चों के अनुपात से शिक्षकों की संख्या कम है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अनुसार 30 बच्चों पर एक शिक्षक का अनुपात होना चाहिए। अब विभाग जिन स्कूलों में 50 से कम बच्चे हैं, उनके बच्चे नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट करने जा रहा है।
विभाग की मंशा एकदम साफ है कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। हर विषय पढ़ सकें। इसलिए जिन विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम है वह बच्चे दूसरे विद्यालयों में शिफ्ट होंगे। विद्यालय बंद नहीं हो रहे हैं, बल्कि इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी में प्रवेश लेने वाले बच्चों को पढ़ाया जाएगा। - मनोज गिरि, सहायक निदेशक शिक्षा (बेसिक) मंडल अलीगढ़
सरकार परिषदीय विद्यालयों को बंद करने पर तुली है। उन बच्चों का क्या होगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। - मोहम्मद अहमद, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, अलीगढ़
बच्चों के समायोजन के पक्ष में नहीं हैं। सरकार को अपने फैसले पर गौर करना चाहिए, ताकि बच्चों का नुकसान न हो सके। - मुकेश सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अलीगढ़
समायोजन नहीं होने देंगे। इसके लिए आंदोलन करेंगे। सरकार के इस फैसले से बाल शिक्षा अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।-डॉ. प्रशांत शर्मा, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ, अलीगढ़