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पोषण और टीकाकरण से आई बाल मृत्यु दर में गिरावट

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पिछले कुछ वर्षों में संस्थागत प्रसव के लिए किए गए सरकारी प्रयास और गर्भधारण के समय से ही गर्भवती महिला का रजिस्ट्रेशन कर जच्चा बच्चा के स्वास्थ्य की सघन निगरानी से प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद बच्चों की मृत्यु दर में गिरावट आई है। इसके अलावा गत वर्ष जिला महिला अस्पताल में शुरू हुए मदर्स एंड चाइल्ड केयर सेंटर के बाद से भी उच्च स्तरीय संस्थागत प्रसव की सुविधा मिलने लगी है। विभागीय आंकड़ों की बात करें तो एक दशक पहले तक एक वर्ष में जिले में प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद (नौ महीने तक) करीब 150 से अधिक बच्चों की मौत हो जाती थी। वर्तमान में अब यह आंकड़ा सिर्फ 34-35 तक सिमट गया है।
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जिले के मोहन लाल गौतम महिला चिकित्सालय, दीन दयाल संयुक्त अस्पताल सहित 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग में चार दशक तक सेवाएं दे चुके और परिवार कल्याण कार्यक्रम से जुड़े रहे फैज अहमद कहते हैं कि पिछले एक दशक में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं। इसी का नतीजा है कि न सिर्फ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता आई है बल्कि जन्म के बाद बच्चों के टीकाकरण और पोषण के क्षेत्र में भी काम हुआ है। जिसका परिणाम बाल मृत्यु दर में कमी के रूप में देखा जा सकता है।
गौरतलब हो कि राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सौ से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। प्राथमिक स्तर जो कारण सामने आए हैं, उनमें सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था, गर्भवती व नवजात की समुचित देखभाल न होना, जीवनरक्षक प्रणाली के उपकरण खराब होना, सर्दी से बचाव के इंतजामों की अनदेखी और स्टाफ की कमी आदि हैं। इस मामले को लेकर पूरे देश में हड़कंप मच हुआ है।
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इस तरह होती है सघन निगरानी
- गर्भधारण करने के तीन महीने बाद क्षेत्र की एएनएम या आशा महिला का नाम पता और अन्य विवरण अपने रजिस्टर में दर्ज करती है।
- महिला का प्रत्येक 15 दिन के बाद स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। एनीमिया, आयरन और अन्य प्रकार की जांच की जाती है।
- गर्भवती को घर से अस्पताल ले जाने और अस्पताल से घर छोड़ने के लिए सरकारी एंबुलेंस नि:शुल्क उपलब्ध रहती है।
- अगर गर्भवती में आयरन, कैल्शियम की कमी है तो उसको सप्लीमेंट दिए जाते हैं।
- प्रसव से पहले सभी प्रकार की जांचें और बच्चे का टीकाकरण पूरी तरह नि:शुल्क किया जाता है।
- जन्म के बाद भी जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य पर आशा के माध्यम से निगरानी, टीकाकरण चार्ट बनाया जाता है।
- संस्थागत प्रसव के बाद पांच हजार रुपये चरणबद्ध तरीके से महिलाओं को देने का प्रावधान है।
सबसे एडवांस है मदर्स एंड चाइल्ड केयर यूनिट
अपर निदेशक स्वास्थ्य व जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं कि जिला महिला अस्पताल परिसर में सौ बेड की मदर्स एंड चाइल्ड केयर यूनिट में प्रसव संबंधी चिकित्सा की सभी आधुनिक सुविधाएं हैं। यहां पर अब सीजेरियन आपरेशन हो रहे हैं। बच्चों के लिए एसएनसीयू (समय पूर्व पैदा हुए नवजात को रखने वाली यूनिट) है। साथ ही क्रिटिकल सीजेरियन की भी सुविधा है। इस यूनिट के शुरू होने से भी प्रसव और प्रसव के बाद बाल मृत्यु दर में और भी कमी आएगी। यह अस्पताल प्रसव और प्रसव के बाद सबसे आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं देने वाला सबसे बड़ा अस्पताल बन गया है।
सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन और गर्भवती का रजिस्ट्रेशन के बाद उसकी ट्रैकिंग से बाल मृत्यु दर में कमी आई है। मोहन लाल जिला महिला अस्पताल में तो पिछले तीन वर्षों में किसी बच्चे की प्रसव या प्रसव के बाद मृत्यु ही नहीं हुई। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से अस्पताल को प्रशस्तिपत्र भी दिया गया
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- डॉ. गीता प्रधान, अपर निदेशक, स्वास्थ्य
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