महिलाएं और परिवार के सदस्य नंगे पांव ही घाटों की ओर बढ़ रहे थे। हाथों में गन्ने थे, सिर पर प्रसाद की टोकरी में सिंघाड़ा, मूली, सेब, अमरूद, गाजर आदि मौसमी फल और सब्जियां व ठेकुआ प्रसाद रखा गया था। सेंटर प्वाइंट के टीकाराम मंदिर व बदरबाग पहुंचते ही आस्था का सैलाव उमड़ पड़ा। घाटों पर पहुंचकर व्रतियों ने वेदी पूजन किया। फिर सभी सूर्यदेव के उदय होने का इंतजार करते रहे। लालिमा लिए सूर्यदेव की आगवानी हुई तो डाला लिए व्रती घाट में पहुंच गई। धूप-दीप जलाकर आरती की और छठी मइया से प्रार्थना की।
सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और छठ माता की सुख-समृद्धि की कामना की। सभी ने अगले साल फिर से छठ मईया से आने की मंगल कामना की। इसके वाद व्रतियों ने घर के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और प्रसाद बांटा। इसके बाद घर पर पहुंचकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का परायण किया। टीकाराम मंदिर के पुजारी राजू पंडित ने बताया कि इस बार लोगों में छठ मईया के व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
सोशल मीडिया पर छाया पर्व
छठ मइया के पर्व को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने एक-दूसेर को शुभकामना संदेश का आदान-प्रदान किया। बच्चों ने अर्घ्य देने के समय सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर शेयर भी किया तो दूर बैठे रिश्तेदारों को फोन कर छठ पर्व की शुभकामनाएं दी।