तहरीर से प्रार्थना पत्र तक
पहले किसी भी फरियादी के थाने पहुंचते ही तहरीर शब्द से प्रक्रिया शुरू होती थी, लेकिन अब इसे प्रार्थना पत्र कहा जाने लगा है। इसके बाद एफआईआर भी सरल भाषा में दर्ज की जा रही है। उदाहरण के तौर पर अलीगढ़ मंडल के थानों में अब तहरीर की जगह प्रार्थना पत्र और जटिल शब्दों की जगह सामान्य हिंदी का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। एक थाने में तैनात इंस्पेक्टर बताते हैं कि अब वे अपनी केस डायरी में अरबी-फारसी या उर्दू के शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते। अन्य स्टाफ भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पुरानी व्यवस्था भी हुई खत्म
पहले थानों में लिखापढ़ी के लिए सेवानिवृत्त मुंशी और दरोगा तक को किराये पर रखा जाता था। उन्हें अनुभव के आधार पर केस डायरी और दस्तावेज लिखवाए जाते थे। कंप्यूटराइजेशन के बाद यह परंपरा भी लगभग समाप्त हो चुकी है।