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चंद्रपाल गैंग डाल रहा था डकैती, तीन दबोचे

Fri, 07 Jul 2017 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बन्‍ना देवी थाना पुलिस की गिरफ्त में पकड़े गए बदमाश। - फोटो : अमर उजाला
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महानगर में पेशेवर अपराधी चंद्रपाल का गैंग घरों में लूट व डकैतियां डाल रहा था। यह खुलासा बन्नादेवी पुलिस ने गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर किया है।
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पकड़े गए बदमाशों ने रघुवीरपुरी में कारोबारी के घर लूट की वारदात स्वीकारी है। साथ में गांधी पार्क में सर्राफ के घर डकैती की कोशिश स्वीकारी है। खास बात है कि यह चंदे की पर्ची काटने के नाम पर घरों की रेकी करने के बाद वारदात किया करते थे। आने वाले एक-दो दिन यह गैंग दिल्ली के खुरैजी इलाके में वारदात की प्लानिंग में था। इससे पहले दबोचा लिया गया। हालांकि दो सदस्य अभी फरार हैं, बताया गया है कि वह दिल्ली में ही वारदात स्थल की रेकी के लिए निकले हुए हैं।

एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव ने गुरुवार को पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता में बताया कि 22/23 जून की तड़के अशोक नगर रघुवीरपुरी निवासी कारोबारी श्याम सुंदर वार्ष्णेय के घर बदमाश घुसे थे और परिजनों को बंधक बनाकर लूट को अंजाम दिया। हालांकि बाद में जांच में साफ हुआ कि बदमाश कई घंटे से दरवाजे पर खड़े थे और भोर हो जाने के कारण कुछ ले नहीं जा सके। इस मामले में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की तलाश शुरू हुई तो सासनी गेट के पेशेवर अपराधी चंद्रपाल गैंग के सदस्य रडार पर आए। चंद्रपाल सिविल लाइंस के स्टारलिंग कंपाउंड श्याम नगर के प्रख्यात डॉ.वाईके द्विवेदी के घर 50 लाख की चोरी में जेल में है।
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इसी आधार पर पुलिस ने सर्विलांस टीम की मदद से गुरुवार तड़के फायर बिग्रेड पड़ाव इलाके से मुठभेड़ के बाद तीन बदमाश दबोच लिए, जबकि उनके दो साथी भाग गए। पकड़े गए बदमाशों ने अपने नाम ज्ञानेंद्र प्रताप सिह उर्फ बॉबी निवासी नगला पारे पचौं सिकंदराराऊ, संजय निवासी चंदनिया क्वार्सी, कुलदीप निवासी नगला मान सिंह डोरी नगर बताए। फरार साथियों के नाम भूरा निवासी पला व बिजेंद्र निवासी सिकंदराराऊ बताए। इनमें से संजय डॉ.द्विवेदी के घर चोरी में जेल गया था, जबकि ज्ञानेंद्र वर्ष 2015 में रोडवेजकर्मी विचित्र सिंह की गभाना में हत्या में जेल गया था। जेल से छूटकर यह गैंग चंद्रपाल के लिए काम कर रहा था। उन्होंने श्याम सुंदर के घर लूट स्वीकारने के साथ-साथ 6/7 जून की रात नौरंगाबाद में ज्वैलर्स के घर में घुसकर तिजोरी काटने की कोशिश स्वीकारी।
वहां जगार होने पर कुछ नहीं मिल पाया था। बदमाशों के अनुसार संजय ने श्याम सुंदर के भाई के यहां नौकरी की है। इसलिए उन्हें यह घर रास आया और बिजेंद्र ने इस घर की रेकी की। सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुई इस गिरफ्तारी में इंस्पेक्टर बन्नादेवी रविंद्र सिंह के अलावा उनकी टीम, सर्विलांस प्रभारी राकेश यादव, अभय शर्मा, एमपी सिंह, सुभाष, ऋषिपाल सिंह, पवन, मनोज, धीरज, विनोद आदि शामिल रहे       हैं। एसएसपी ने इस सफलता पर टीम को 5 हजार इनाम की घोषणा की है।

दो एसओजी कर्मियों के घर भी काटने पहुंचे रसीद
एसपी सिटी ने जब मीडिया को जानकारी दी कि यह लोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश वृंदावन मथुरा नाम की एक विकलांग बच्चों की शिक्षण संस्थान के नाम पर दान की रसीद काटने दरवाजे पर पहुंचते हैं और वहीं घर में महिला से पानी मांगने के बहाने बातचीत कर सदस्यों आदि तक की जानकारी कर लेते हैं। इसके बाद घर को निशाना बनाकर रेकी करने के बाद वारदात करते थे। इसी समय सर्विलांस टीम में शामिल अभय शर्मा व सुभाष ने बताया कि यही लोग उनके घरों पर भी पहुंचे थे, मगर उन्हें भगा दिया था।

चेहरे और कलावे ने पहुंचाया संजय तक
पुलिस ने इस वारदात के बाद जब सीसीटीवी में संजय के चेहरे व उसके कलावे को पहचाना तो पुलिस खुलासे के प्रति आश्वस्त थी। क्योंकि पुलिस ने संजय को डॉ.द्विवेदी के घर चोरी में दबोचा था और देखते ही पहचान लिया था।
गैंग ने स्वीकारा कि उनकी शहर के अलावा दिल्ली के खुरैजी सहित कई इलाकों में डाके की प्लानिंग थी। खुरैजी वाली वारदात के लिए भूरा व बिजेंद्र दिल्ली में थे। यह गैंग जाने से पहले से दबोच लिया गया।
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