इस साल जुलाई अब तक सूखी ही रही है। महीने के 18 दिन में मात्र तीन एमएम बारिश हुई है। इससे धान उत्पादक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। उन्हें धान की पौध बचाने की फिक्र है। इधर, डीजल महंगा होने से छोटे किसान ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं कर पा रही हैं। अब तक करीब 70 फीसदी धान की पौध की रोपाई हो चुकी है।
जिले में 84.162 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। यहां 95 प्रतिशत क्षेत्र में बासमती धान का उत्पादन होता है। पिछले साल जिले में 227.335 मीट्रिक टन चावल का उत्पादन हुआ था। जून में नर्सरी तैयार करने के बाद इस समय किसान धान की पौध की रोपाई करने में जुटे हैं। अब तक 70 फीसदी धान की पौध रोपी जा चुकी है। लेकिन बारिश न होने के कारण खेतों लगी पौध सूखने लगी है। जुलाई माह का पहला सप्ताह सूखा गुजर गया तो दूसरे सप्ताह के अंत में हल्की बारिश हुई। शनिवार सुबह भी कुछ देर बूंदाबांदी तो हुई, लेकिन तेज वर्षा नहीं हुई। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश कम होने से धान की पौध को बचाने के लिए किसान शाम के समय खेतों में हल्की सिंचाई करें। खेतों को पानी से भरने के बजाय बस उसे गीला रखें। इससे पंप सेटों के चलने से डीजल भी कम लगेगा और फसल की सेहत ठीक रहेगी। खरपतवार को रोकने के लिये खरपतवार नाशक दवा का प्रयोग करें।
जुलाई में चार वर्षों के बारिश के आंकड़े
- वर्ष 2018-19-319 एमएम
- वर्ष 2019-20-86 एमएम
- वर्ष 2020-21-71 एमएम
- वर्ष 2021-21-17 जून तक-3 एमएम
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- बारिश न होने से धान की पौध सूख रही है। हम किसी तरह बचाने की कोशिश कर रहे हैं। डीजल पर महंगाई और बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि से पंप सेट भी चलाना महंगा हो गया है। जल्द ही बारिश नहीं पड़ी तो धान की पौध को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
- पृथ्वी सिंह चौहान, किसान, गांव हरदुआ
- जुलाई में बारिश न होने से धान उत्पादक किसान मुश्किल में पड़ गया है। डीजल के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने किसानों की कमर तोड़ने में कसर नहीं छोड़ी है। डीजल के दाम वर्तमान में 91 रुपये प्रति लीटर हैं, जो पिछले साल की तुलना में 30 रुपये अधिक हैं। खाद बीज समेत अन्य संसाधनों पर महंगाई से धान की खेती की लागत में करीब 35 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है।
- डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह, भाकियू भानु के प्रांतीय महासचिव