खैर रोड स्थित कब्रिस्तान में जल निगम द्वारा चलाई गई जेसीबी को रूकवाने पहुंचे पार्षद व पुलिसफोर्स।
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महानगर के थाना देहली गेट क्षेत्र में इंद्रा नगर खैर रोड पर इसराइली कब्रिस्तान में जेसीबी मशीन से नलकूप खुदाई का काम विवाद होने के बाद रोक दिया गया। इसे लेकर वहां जमकर हंगामा हुआ। आरोप है कि खुदाई करके पुरानी कब्रों को खोद दिया गया, जिससे मुर्दों की भी हड्डियां बाहर निकल आईं। बताया गया कि यहां पर जल निगम नलकूप के लिए खुदाई करना चाहता है। मौके पर एसडीएम कोल, स्थानीय पुलिस और स्थानीय पार्षद मुशर्रफ हुसैन स्थानीय लोगों के साथ पहुंचे और काम रुकवाया। हंगामा कर रहे लोगों को समझाकर शांत किया। वहीं इस संबंध में थाना देहली गेट में तहरीर दी गई है।
मुशर्रफ हुसैन की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि सांवरिया गेस्ट हाउस के पीछे इस कब्रिस्तान के संबंध में सोमवार को इलाके के एक आदमी ने सूचना दी कि जेसीबी से कब्रिस्तान के अंदर खुदाई चल रही है। इसके बाद वहां स्थानीय लोगों की भीड़ लग गई और पार्षद मुशर्रफ हुसैन भी वहां पहुंच गए। यहां देखा तो 100-100 साल पुरानी कब्रें खोद दी गई थीं। कब्रिस्तान के गेट और बाउंड्री को भी ध्वस्त कर दिया गया है। मुर्दों की हड्डियां बाहर बिखरी हुई हैं।
इससे मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। बताया गया कि इस काम को अशोक अग्रवाल नाम का एक व्यक्ति जो स्वयं को यूपी जल निगम का प्रोजेक्ट मैनेजर बता रहा है, वही करवा रहा है। इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की मांग की गई है। थाना प्रभारी देहली गेट ने बताया कि तहरीर मिल गई है। मामले की जांच एसडीएम कोल रंजीत सिंह कर रहे हैं। तब तक काम रुकवा दिया है।
गाटा संख्या 520 में नगर निगम की 1320 मीटर जमीन है। कुछ जमीन निजी है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि जहां पर नलकूप खुदाई का काम हो रहा है, वह जमीन किसके स्वामित्व की है। स्थानीय लेखपाल को इसके आदेश दे दिए गए हैं। तीन दिन में उससे रिपोर्ट मांगी गई है। पूर्व में स्थानीय विधायक, पूर्व मेयर, और स्थानीय सभासद की सहमति से यहां पर नलकूप लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अगर यह जमीन जहां पर खुदाई हुई है, वह किसी निजी व्यक्ति की है तो उसको छोड़कर नगर निगम के स्वामित्व वाली जगह पर नलकूप लगाया जाएगा। मौके पर खुदाई के दौरान एक दो कब्रों के निशान मिले हैं।
- रंजीत सिंह, एसडीएम कोल
हमारे बुजुर्गों की हड्डियों को खोद कर बाहर निकाल दिया गया है। यह मुसलमानों पर अत्याचार है। जिस सहमति की बात कही जा रही है वह अपनी जमीन में दें समाज की जमीन से क्या मतलब है। यह कब्रिस्तान 200 साल पुराना है। मंगलवार को इस संबंध में जिलाधिकारी और कमिश्नर से मिलकर ज्ञापन दिया जाएगा।
- मुशर्रफ हुसैन, पार्षद