एफआरसीए के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन न करने पर केंद्र सराकर द्वारा कई संगठनों का पंजीकरण रद्द किए जाने से एएमयू को भी झटका लगा है। लाइसेंस रद्द होने के कारण एएमयू को विदेशों से मिलने वाले फंड पर रोक लग जाएगी।
केंद्र सरकार की इस कार्रवाई को लेकर एएमयू इंतजामिया में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एएमयू प्रशासन का कहना है कि संस्थान लाइसेंस रिन्यूअल की प्रक्रिया की श्रेणी में ही नहीं आता है, वह शीघ्र ही गृह मंत्रालय के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा।
दरसअसल केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन 11,319 संगठनों का पंजीकरण रद्द कर दिया है जिन्होंने इस साल 30 जून तक एफसीआरए के तहत रजिस्ट्रेशन के रिन्यूअल के लिए आवेदन नहीं किया था। इस सूची में करीब अनाथालय, सैकड़ों स्कूल और संस्थान जैसे भारतीय सांख्यिकी संस्थान और समाज के वंचित बच्चों के लिए काम करने वाले प्रतिष्ठित एनजीओ शामिल हैं। केंद्र की इस कार्रवाई की जद में एएमयू भी आ गया। इससे एएमयू को विदेशों से मिलने वाली फंडिंग पर रोक लग जाएगी।
इस मामले में एएमयू के फाइनेंस अफसर प्रो. एसएम जावेद ने बताया कि पहली जुलाई 2011 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने इस संबंध में स्पष्ट गजट जारी किया है, जिसमें लिखा है कि संसद के एक्ट से बने संस्थान लाइसेंस रिन्युअल कराने की प्रक्रिया अलग रहेंगे।
ये वो संस्थान होंगे जिनका ऑडिट कै ग की टीम से होता है। ऐसे में एएमयू इंतजामिया को लाइसेंस रिन्युअल की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। यही नहीं 16 सितंबर 2016 को इस प्रकरण में गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर एएमयू इंतजामिया ने अपना पक्ष रख दिया है। अगर ये पत्र गृह मंत्रालय नहीं पहुंचा तो दूसरा पत्र सोमवार को लिखा जाएगा।