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निराश्रित गोवंश पहुंच रहे गोशाला, जियो टैगिंग से हो रही निगरानी

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भूखे प्यासे गर्मी से बेहाल निराश्रित गोवंश हिंसक हो गए हैं। आए दिन कहीं न कहीं लोग इनके गुस्से का शिकार हो रहे हैं। सड़कों पर जाम लग रहा है तो कूड़ा भी फैल रहा है। मंडलायुक्त अजयदीप सिंह ने गत दिनों हर हाल में निराश्रित गोवंश को यथाशीघ्र गोशालाओं में पहुंचाने का आदेश दिया। शासन स्तर से मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में इसको शुमार किया गया है। लगातार इनकी मानीटरिंग हो रही है। इस सख्ती का असर अब दिखने लगा है।
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नगर निगम ने शहरी इलाकों में घूम रहे ऐसे गोवंश को पकड़ कर गोशालाओं तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए दो कैटल केचर टीम लगा दी हैं। जिसमें 25 कर्मी शामिल हैं। 13 से 18 जून के बीच चले विशेष अभियान में 375 गोवंश पकड़े गए हैं। जिसमें लगभग 200 गाय और 175 सांड़ और बछड़े शामिल हैं। जिनको नगर निगम की सारसौल स्थिति गोशाला और गभाना में कोमला कंदौली में पहुंचाया गया है। ये अभियान अभी जारी रहेगा।
नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल ने बताया कि कैटल केचर टीम सही से काम करे इसके लिए जिया टैगिंग एप की मदद ली जा रही है। कैटल केचर टीम के कर्मी अपने स्मार्ट फोन पर गूगल प्ले स्टोर से जियो टैगिंग एप डाउनलोड कर लेते हैं। इसके बाद वो जब फोटो करते हैं तो उस स्थान की लैटीट्यूट लांगीट्यूट (अक्षांश देशांतर) स्थिति आती है। इस स्थिति में समय, दिन, दिनांक और स्थान आ जाता है। ये फोटो रिकार्ड के लिए भी इंटरनेट में सुरक्षित रहता है। जिसे कभी भी देखा और जांचा जा सकता है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. केपी वार्ष्णेय ने बताया कि गोशाला में पहुंचने के बाद इन गोवंशों की ईयर टैगिंग की जाएगी। जिससे उनकी गिनती होगी। इस गिनती में उनकी संख्या, प्रजाति, गाय और सांड़, उसकी उम्र और बीमारी सहित पूरा डाटा तैयार हो जाएगा। इसी डाटा के आधार पर प्रदेश सरकार के इनके खाने पीने की व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश सरकार की ओर से प्रति दिन 30 रुपये प्रति गोवंश का भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए अलीगढ़ को हाल ही में डेढ़ करोड़ रुपये दिए गए हैं। गोशालाओं में पहुंचे गोवंशों में से अब तक 9 हजार की ईयर टैगिंग की जा चुकी है।
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