डीडीयू अस्पताल के सीमएस डॉ. एमके माथुर ने बताया 21 मई से 20 जून तक अस्पताल में सर्पदंश के छह केस आए। जिसमें से दो मरीजों को अस्पताल में उपचार दिया गया। बाकी चार को मेडिकल कालेज रेफर किया गया। अभी तक 40 वायल खर्च हुए हैं। अस्पताल में करीब 450 एएसवी के वायल मौजूद हैं।
जेडी हेल्थ डॉ. मोहन झा ने बताया कि सर्पदंश घातक हो सकता है। सभी सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध है। सर्प दंश वाले स्थान पर दांतों के हल्के या स्पष्ट दिखने वाले निशान व जख्म होते हैं, जो सूजन से कई बार ढक जाते है। इनमें दंश के स्थान पर तीव्र जलन, सूजन और दर्द होना, आवाज का बैठना, ज्यादा नींद लगना, तनाव, मिचली व उल्टी होना के मुख्य लक्षण हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचा कर उपचार कराएं।- डॉ मोहन झा, जेडी हेल्थ, अलीगढ़
हर अस्पताल में है एंटी स्नेक वेनम
- सीएचसी गोंडा- एएसवी वायल (एंटी स्नेक वेनम) है। मगर साल भर से कोई मरीज दर्ज नहीं हुआ।
- सीएचसी बिजौली- एएसवी वायल है। मगर साल भर से कोई मरीज दर्ज नहीं हुआ।
- सीएचसी गंगीरी-एएसवी है।
- सीएचसी खैर-एएसवी है।
- सीएचसी चंडौस-एएसवी है।
- सीएचसी गभाना-एएसवी है।
- सीएचसी टप्पल-एएसवी है।
- सीएचसी अतरौली-एएसवी है।
- सीएचसी जवां-एएसवी है।
- पीड़ित को अत्यधिक दबाव या घबराहट न होने दें।
- सांप पर हमला करने या उसे मारने की कोशिश ना करें।
- घाव को बांध कर रक्त संचार रोकने का प्रयास न करें।
- रोगी को पीठ के बल न लिटाएं, इससे वायुमार्ग में रुकावट हो सकती है।
- पारंपरिक तरीकों से उपचार करने का प्रयास न करें।
झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें, तत्काल पहुंचे अस्पताल
अगर कहीं भी किसी को सांप डसता है तो तत्काल उसे अस्पताल लेकर जाएं। यहां चिकित्सक परीक्षण करने के बाद एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाएंगे। कई बार झाड़फूंक के चक्कर में लोगों की तबीयत बिगड़ जाती है। मौत तक हो जाती है।