छात्रों ने सवाल उठाया कि अगर वह अपने सभी विषयों की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन कराना चाहते हैं तो एएमयू इंतजामिया उस पर बंदिशें क्यों लगा रही है? केवल ही एक विषय का पुनर्मूल्यांकन कराने का नियम बताकर उनके भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है?
समय और परिस्थितियों के साथ बदलना प्रकृति का नियम है, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) अपनी रवायतों पर कायम है। यही रवायतें एएमयू के स्कूल की कक्षा-12 के सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर भारी पड़ रही हैं।
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पिछले दिनों एएमयू के स्कूल की कक्षा 12 का परीक्षा परिणाम आया था, जिसमें कुछ विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हो गए और कुछ के अंक कम आए हैं। इसके विरोध में विद्यार्थियों ने बाब-ए-सैयद से लेकर कुलसचिव के कार्यालय के सामने प्रदर्शन भी किया। वह हर उस जगह जा रहे हैं, जहां उम्मीद है कि उनका कुछ भला हो जाएगा। बच्चों के भविष्य को लेकर उनके अभिभावक भी परेशान हैं। 40 से 48 फीसदी अंक मिलने से उनका न तो नीट और न ही स्नातक में दाखिला हो सकेगा।
छात्रों ने सवाल उठाया कि अगर वह अपने सभी विषयों की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन कराना चाहते हैं तो एएमयू इंतजामिया उस पर बंदिशें क्यों लगा रही है? केवल ही एक विषय का पुनर्मूल्यांकन कराने का नियम बताकर उनके भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है?
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उन्होंने कहा कि अगर एक विषय के पुनर्मूल्यांकन का शुल्क 300 रुपये है तो पांच विषयों का शुल्क 1500 रुपये होगा। इसमें वह भी संतुष्ट हो जाएंगे और एएमयू का भी कोष बढ़ेगा। हालांकि यूपी बोर्ड में सभी विषयों का पुनर्मूल्यांकन कराने की छूट है। इस संबंध में एएमयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. मुजीबउल्लाह जुबैरी का कहना है कि केवल एक ही विषय में पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था है।