अकराबाद थाना क्षेत्र के दुभिया व खुर्रमपुर समेत कुछ अन्य गांवों मेंकरीब 45 हैंडपंप के साथ लगाए गए शिलालेख एवं कब्रनूमा चबूतरे का मामला तूल पकड़ गया है। छर्रा से भाजपा विधायक ठा. रवेंद्रपाल सिंह के तहरीर पर थाना अकराबाद में दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। विधायक के अनुसार इस मामले में विदेशी साजिश की बू आ रही है।
रविवार को क्षेत्र लोगाें के साथ विधायक ठा. रवेंद्र पाल सिंह अकराबाद थाने पहुंचे। विजयगढ़ खुर्रमपुर निवासी शमशेर पुत्र शेर मोहम्मद एवं बारिक अली निवासी धौर्रा माफी के खिलाफ तहरीर दी। आरोप है कि ग्राम दुभिया, खुर्रमपुर समेत न्य गांवों में करीब 45 हैंडपंप -नंबर 4 छोटी मशीन- विदेशी साजिश के अंतर्गत जनता को गुमराह कर लगाई गई है। हैंडपंप लगाने के साथ एक शिलालेख लगाया गया है, जिसमें अरबी भाषा का प्रयोग करते हुए भारत वर्ष का ध्वज एवं कुवैत का ध्वज लगाया गया है। भारत के ध्वज संहिता का उल्लंघन करते हुए सोची-समझी साजिश के तहत ध्वज के चक्र में 24 तीलियाें के स्थान पर मात्र 8 तीलियां लगाई गई है।
यह भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान एवं राष्ट्रद्रोह है। हैंडपंप के चबूतरे की डिजाइन कब्रनुमा है, जो असामाजिक तत्वों की सोची समझी साजिश है। 60 फुट पर हैंडपंप लगाकर आम जनता को गंदा पानी पिलाने की नापाक साजिश है, ताकि लोग बीमार पड़े और सरकार की छवि धूमिल हो। रवेंद्र पाल सिंह ने पूरे मामले की जांच कर विदेशी ताकतों की साजिश का पर्दाफाश करने की मांग की है। कहा कि क्षेत्र की जनता की सुरक्षा खतरे में है। इन लोगों के पास शासन-प्रशासन की कोई अनुमति भी नहीं है। विधायक की तहरीर पर राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, आईपीसी 269 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
लोकसभा चुनाव के पहले बरौली में लगे थे हैंडपंप, यूएई के झंडे
लोकसभा चुनाव के दौरान बरौली विधान सभा क्षेत्र में भी विदेशी सहयोग वाले हैंडपंप लगे थे। इसकी शिकायत प्रशासन तक पहुंची थी लेकिन उस समय किसी ने ध्यान नहीं दिया।
छर्रा विधानसभा क्षेत्र के विधायक ठाकुर रवेंद्र पाल सिंह द्वारा अकराबाद क्षेत्र के कुछ गांवों में विदेशी सहयोग से लगे हैंडपंप पर आपत्ति दर्ज की गई है। जनपद के लिए यह कोई पहली घटना नहीं है। लोकसभा चुनाव के दौरान गभाना के बिसारा गांव सहित कुछ अन्य गांवों में ऐसे मामले सामने आए थे। उस समय अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा यह मामला उठाया गया था।
हैंडपंप के साथ लगे शिलालेख पर यूएई का झंडा भी लगा था। उसमें तो तिरंगा था ही नहीं। महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक पांडेय कहते हैं कि यह काम जिले में बहुत दिनों से चल रहा है। चुनाव के दौरान उन्होंने तत्कालीन एसडीएम से शिकायत की थी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज विधायक ने शिकायत की तब प्रशासन को गंभीरता का अहसास प्रशासन को हो रहा है। अशोक पांडेय तो हैंडपंप के पीछे कई तरह की साजिश की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। विदेशी फंडिंग के पीछे के मकसद का पता लगाना जरूरी है।
हैंडपंप के साथ विदेशी झंडे का मामला सुनने में आया है। यह भी बताया जा रहा है कि जनपद में ऐसे काम पहले से चल रहे हैं। वह स्थानीय प्रशासन से बात कर इसकी जांच कराने की मांग करेंगे। सच्चाई सभी के सामने आनी चाहिए।
- सतीश गौतम, सांसद