कस्बे में पीसीएफ केंद्र के निकट सहकारी क्रय विक्रय समिति के शीतगृह पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। यहां पर पशुओं को बांधने के साथ ही कमरों में भूसा और कंडे भरे हैं।
पीसीएफ केंद्र के बराबर में वर्ष 1980 के दशक में सहकारिता विभाग ने शीतगृह का निर्माण कराया था। समय के साथ यह बंद हो गया। देखरेख के अभाव में यह खंडहर होता गया। धीरे-धीरे लोगों ने इस भवन में कब्जा जमाना शुरू कर दिया। इसमें लोग मवेशी बांध रहे हैं। एक हिस्से के कमरों में भूसा भरा है। भवन के आसपास खाली पड़ी भूमि में घूरे के ढेर लगे हैं। यह भवन गिरासू हालत में पहुंच चुका है।
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शीतगृह चालू हो तो किसानों को मिलेगी राहत
मौजूदा समय में अतरौली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है। कस्बे में ही पांच शीतगृह हैं। इनकी भंडारण क्षमता करीब आठ लाख बोरों की है। यह शीतगृह पूरी क्षमता से भर जाते हैं, जिसके बाद किसाानों को दूसरी जगह के शीतगृहों में भंडारण के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। किसानों का कहना है कि सहकारी विभाग का यह शीतगृह नवनिर्माण के साथ शुरू करा दिया जाए तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
- यह शीतगृह शुरू हो जाए तो बहुत राहत मिलेगी। प्रशासनिक स्तर पर इसे शुरू कराने का प्रयास होना चाहिए। - गोपाल सिंह, किसान।
- सहकारी शीतगृह से अवैध कब्जा हटवाया जाए। अतरौली में आलू का बड़ा रकबा है। सरकार इसे दोबारा शुरू कराए। - मुंशीलाल, किसान।
- उच्चाधिकारियों को पत्राचार कर शीतगृह से अवैध कब्जा हटवाया जाएगा और इसकी सफाई कराई जाएगी। - दयाशंकर शर्मा, प्रभारी/सचिव।