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सीएए के विरोध प्रदर्शन का एक सालः बुझी आग की राख से निकल रहीं चिंगारियां

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दीपक शर्मा
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) व नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) के विरोध में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का एक साल पूरा हो रहा है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। 14 और 15 दिसंबर 2019 की रात को ये आंदोलन अचानक हिंसक हो गया था। विश्वविद्यालय के इतिहास में यह दिन कभी नहीं भुलाया जा सकता जब कई छात्रों के गोलियां लगी। पुलिस फ ायरिंग हुई। छात्रावास अग्निकांड का शिकार हुए। दूसरी तरफ दर्जनों पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी इस हिंसा में घायल हुए। यही नहीं एएमयू छात्रों को हिरासत में लेने के विरोध में शहर में जगह जगह प्रदर्शन हुए। छात्रों की रिहाई हुई तो पूरे शहर में आंदोलन चला। सैकड़ों लोगों को पाबंद किया गया। दर्जनों मुकदमे दर्ज हुए। अभी तक उन मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। छात्र नेता कहते हैं कि उनका संघर्ष थम जरूर गया है, लेकिन सफ र अभी जारी है। महामारी के चलते बने हालात में बहुत सी गतिविधियों को प्रभावित किया है।
क्या कहते हैं छात्र नेता
15 दिसंबर 2019 एएमयू के इतिहास का एक काला पन्ना है। इसमें एएमयू के अधिकारियों के निर्देश पर ही पुलिस ने छात्रों के साथ गुंडे बदमाशों और आतंकवादियों जैसा सलूक किया। आंसू गैस के गोले दागे गए, गोलियां चलाई गई। वह रात हम कभी नहीं भूल सकते ।
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-नदीम अंसारी, पूर्व उपाध्यक्ष छात्रसंघ एएमयू
निहत्थे मासूम छात्रों को निशाना बनाकर चलाई गोलियों से वह जख्मी हो गए। यहां तक के घायल छात्रों को ले जा रही एंबुलेंस के चालकों तक को पीटा गया। जब भी माहौल सामान्य होगा इन सभी बातों का हिसाब मांगा जाएगा। अफसोस की बात यह है कि जो इस काम के दोषी हैं, उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
- जानिब हसन, छात्र नेता
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के परिसर में पुलिस ने अंदर घुस कर फायरिंग की आंसू गैस के गोले छोड़े। निहत्थे छात्रों को मारा पीटा। सवाल यह है कि पुलिस फोर्स को इस बात की इजाजत किसने दी थी। जब तक इस सवाल का जवाब छात्रों को नहीं मिलेगा वह शांत नहीं बैठेंगे।
- मोहम्मद शिकोह, शोध छात्र और वरिष्ठ छात्र नेता
एएमयू छात्र पर हुई बर्बरता पूर्वक कार्रवाई के दोषियों को अभी भी सजा नहीं मिली है। इस देश के संविधान और विधान को बचाने के लिए छात्र संघर्ष कर रहे थे। अब छात्र किसानों के साथ मिलकर संघर्ष कर रहे हैं।
- जमाल अख्तर, पूर्व कैबिनेट सदस्य छात्रसंघ, एएमयू
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में छात्रों का आंदोलन चल रहा था। उसी समय महामारी को प्रकोप फैला और बहुत सी चीजें बदलीं। अब जब माहौल सामान्य होगा तब एक बार फिर से छात्र अपने अधिकारों और अपने हितों के लिए एक बार फिर से आगे आएंगे।
- फ हद पूर्व, सचिव छात्र संघ, एएमयू
पूरा घटनाक्रम
-14 दिसंबर से ही आक्रोश अंदर ही अंदर से लग रहा था, जिसको देखते हुए यूनिवर्सिटी सर्किल पर फोर्र्स तैनात कर दिया गया था। साथ ही शहर में भी थानों को अलर्ट कर दिया गया था।
-15 दिसंबर की रात को प्रदर्शनकारी घंटाघर तक आने की मांग पर अड़ गए। पुलिस फोर्स ने उनको यूनिवर्सिटी सर्किल पर रोक लिया। यहां पर हुए टकराव में दर्जनों छात्र घायल हुए। दर्जनों पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए। बाबे सैयद का गेट टूट गया। मॉरिसन कोर्ट हॉस्टल आगजनी का शिकार हो गया।
-16 दिसंबर को घटना के बाद 26 नामजद छात्र सहित 150 से अधिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। घायल छात्रों और घायल पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को उपचार के लिए भर्ती कराया गया। घटना की गूंज पूरे देश तक फैल गई। मामला स्थानीय प्रशासन से होकर हाई कोर्ट तक पहुंचा।
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-हाई कोर्ट के निर्देश पर इस मामले में एक जांच कमेटी गठित की गई। जिसका नेतृत्व आईपीएस अधिकारी मंजिल सैनी कर रही थीं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंप दी है। जिसमें पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया गया है। इस रिपोर्ट पर आगे कोई प्रगति होती, उससे पहले ही देश महामारी की चपेट में आ गया। अभी यह सब प्रकरण विचाराधीन चल रहे हैं।
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