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नागरिकता कानूनः साहब! शेरवानी वाले आते हैं धरने के लिए बुलाने

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साहब! शेरवानी वाले आते हैं धरने के लिए बुलाने। नाश्ता, खाना और पैसे देने की बात कहते हैं तो उनके साथ धरने में चले जाते हैं। हम लोग रोजाना कमाने खाने वाले लोग हैं। कई महिलाओं ने यह भी स्वीकार किया कि शेरवानी वालों के कहने पर उनके पति धरने में भेजते थे। पूछताछ में शाहजमाल, जीवनगढ़ समेत अन्य स्थानों पर धरने में बैठे लोगों के ये शब्द धरना देने वालों की एनआरसी व सीएए के प्रति समझ और रुख को समझाने के लिए काफी हैं। साथ ही धरना प्रदर्शन के पीछे एएमयू छात्रों की अहम भूमिका की ओर भी इशारा करते हैं।
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अलीगढ़ में बीती नौ दिसंबर से सीएए और एनआरसी के विरोध में धरना प्रदर्शन जारी हैं। शनिवार शाम को बमुश्किल 125 घंटे बाद क्वार्सी बाईपास खुलवाया जा सका। इससे पहले एएमयू, जमालपुर, दोदपुर, शाहजमाल ईदगाह, ऊपरकोट पर धरना प्रदर्शन हुआ। 23 फरवरी को ऊपरकोट और बाबरी मंडी में उपद्रव भी हुआ। इसके बाद जीवनगढ़ में प्रदर्शनकारी कई दिनों तक पुलिस एवं प्रशासन के लिए सिरदर्द बने रहे। धरना प्रदर्शन के दौरान इन सभी स्थानों पर जिस कदर भीड़ जुटी, उसने सभी को हैरान कर दिया। जीवनगढ़ व एएमयू चुंगी पर धरना समाप्त होने के बाद जब जांच हुई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए।
पता चला कि धरने में विशेष रूप से नगला पटवारी, फिरदौस नगर, भमोला और रेलवे किनारे की झुग्गियों में रहने वाले लोग शामिल थे। एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह ने बताया कि पिछले दिनों धरने में शामिल लोगों से पूछताछ में कई लोगों ने स्वीकार किया कि उनके पास शेरवानी वाले आते थे और नाश्ता खाना एवं पैसे का लालच देकर साथ ले जाते थे। हम लोग रोजाना कमाने खाने वाले लोग हैं। कई महिलाओं ने यह भी स्वीकार किया कि शेरवानी वालों के कहने पर उनके पति धरने में भेजते थे।
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साहब! एक लाख की जमानत बहुत ज्यादा है, कहां से लाएंगे
अलीगढ़। साहब, एक-एक लाख की जमानत राशि कुछ ज्यादा ही है। ये लोग बहुत गरीब हैं, कहां से व्यवस्था करेंगे। आप ही कुछ रियायत दे दीजिये। जीवनगढ़ समेत अन्य स्थानों पर धरने के चलते पाबंद किए गए लोगों के पक्ष में पैरवी शुरू हो गई है। मंगलवार को जीवनगढ़, जमालपुर समेत अन्य इलाकों के सम्मानित लोग पाबंद लोगों की पैरवी के लिए एसीएम द्वितीय के पास पहुंचे और रियायत देने की अपील की। यह लोग पाबंद व्यक्तियों की माली हालत खस्ता होने का हवाला देते हुए रियायत बरतने की अपील करते देखे गए।
313 लोगों ने भरे मुचलके तो 12 ने कराई जमानत
अलीगढ़। 24 से 28 फरवरी तक बाबरी मंडी, घास की मंडी समेत अन्य स्थानों पर पाबंद किए गए 313 लोगों ने पिछले तीन दिनों में सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में मुचलके भर दिए हैं। शेष करीब 100 लोगों के नाम जमानती वारंट तैयार करने का काम चल रहा है। इधर एसीएम द्वितीय न्यायालय में करीब 12 लोगों ने जमानत करायी है। जबकि पुलिस की संस्तुति पर दस नये आंदोलनकारियों को पाबंद किया गया है।
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