जेएन मेडिकल कॉलेज में रोते बिलखते परिजनों ने चीख चीखकर बताया कि बिंटू लाला को दूसरी बार मारने की कोशिश हुई। पहली बार में वह लोग सफल नहीं हो सके, मगर दूसरी बार में उन्होंने घटना के दौरान बिंटू को जिंदा छोड़ने का मौका नहीं छोड़ा। इतना ही नहीं, घटना को लूट दर्शाने की कोशिश की गई है। यह सुनते ही पुलिस के कान खड़े हो गए और परिजनों से बातचीत के आधार पर तत्काल बिंटू लाला के विरोधी कस्बे के ही भाजपा नेता कमल अग्रवाल को हिरासत में ले लिया गया।
वहीं कस्बे में तनाव को देखते हुए एहतियातन पीएसी और कई थानों का फोर्स तैनात कर दिया गया है। जिले के प्रमुख व्यापारिक कस्बों में शामिल कस्बा कौड़ियागंज निवासी राजेश वार्ष्णेय का कारोबार पूरे अकराबाद, विजयगढ़ और गंगीरी तक फैला हुआ है। थोक का व्यापार होने के चलते उनके यहां से माल की सप्लाई छोटे दुकानदारों को जाती है। परिवार में पत्नी ललतेश के अलावा बड़ा बेटा सौरभ और छोटा गौरव है।
रविवार को साप्ताहिक बंदी रहती है। उनके बगल में ही तयेरे भाई प्रमोद का भी व्यापार है। इस पर दोनों ने तय किया कि एक साथ तगादा करने चलेंगे। प्रमोद की मानें तो दिन भर के तगादे के बाद करीब साढ़े तीन लाख रुपया उन्होंने एकत्रित किया था। जिसे बदमाश लूट ले गए। पुलिस अधिकारियों से पूछताछ में प्रमोद और बेटे सौरभ के अलावा अन्य परिजनों ने बताया कि एक प्लाट को लेकर करीब 7 साल पहले 2012 में कमल अग्रवाल से उनकी रंजिश शुरू हुई।
उस प्लाट पर कमल अपना कब्जा करना चाहते हैं। इसी रंजिश में उस समय भी बिंटू लाला को गोली मारी गई थी, मगर वह बच गए थे। रंजिश की दूसरी बड़ी वजह यह भी कि कमल अग्रवाल का भी खलचुनी का थोक कारोबार है। बिंटू ने इस कारोबार में भी कमल को टक्कर दे रखी है। दोनों इस बात को लेकर ज्यादा रंजिश रहती है। परिजनों का आरोप है कि इसी वजह से यह हत्या पूरी प्लानिंग से कराई गई है और घटना को लूट दर्शाने के लिए रुपया लुटवाया है।
इधर, मेडिकल कॉलेज के बाद एसएसपी और एसपी देहात घटनास्थल गए और कस्बे में पीड़ित परिवार से भी मिले। वहां उन्होंने सुरक्षा के इंतजाम के निर्देश दिए। इस दौरान एसएसपी ने इतना जरूर बताया कि बैग में रकम 50 हजार से ज्यादा नहीं थी। यह बात जांच में साफ हो गई है। इसलिए घटना को लूट से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।