गांधी पार्क बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में खड़े यात्री।
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परिवहन निगम की आधे से ज्यादा बसें वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं। इस कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आलम यह है कि आगरा, मुरादाबाद, बदायूं, एटा, कासगंज रूट पर घंटों बाद अगर कोई बस आ जाए तो उसमें चढ़ने के लिए लोग धक्कामुक्की करते हैं। सीट पाना तो दूर, कई लोग तो खड़े खड़े सफर करने को तैयार रहते हैं। लेकिन खचाखच भरी भीड़ के चलते कई यात्रियों के हाथ सिर्फ मायूसी ही रहती है।
अलीगढ़ डिपो के पास कुल 115 बसों के संचालन का जिम्मा है। पिछले तीन दिनों में क्रमश: 52-53-52 बसें ही निकल पाई हैं। बुद्ध विहार डिपो के पास 133 बसें हैं। जिनमें से बमुश्किल तीन दिनों में 52 प्रतिशत बसें ही तीन दिनों में निकल पाई हैं। इसके अलावा, हाथरस डिपो की 18 व एटा डिपो की 18 बसें पंचायत सचिवों को लेकर लखनऊ गई हुई हैं। आधी बसों के चलने का मूल कारण खराब पड़ी बस व स्टाफ की कमी है। ऐसे में रूट पर एकदम से बसों की संख्या कम हो गई है।
मंडल की तकरीबन 180 बसें ऐसी हैं, जो दस लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। यह बसें नीलामी के लिए ही बची हैं। लेकिन पिछले तीन सालों में एक भी बस अलीगढ़ को नहीं मिली। चलते चलते कई बसें खराब हो जाती हैं तो स्पेयर्स पार्ट्स का इंतजार किया जाता है। अलीगढ़ के बस अड्डों की बात करें या फिर रूट पर सासनी, हाथरस या आगरा... सभी जगह बसों की किल्लत का खामियाजा यात्री उठा रहे हैं। कई घंटों के इंतजार के बाद अगर बस मिल जाए तो उसमें चढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। इसीलिए बस में चढ़ने के लिए लोग धक्कामुक्की तक करते हैं।
यह बात सत्य है कि बसों के संचालन में कुछ दिक्कत है। आगरा और अन्य रूट पर 20 बसें बढ़वाई गई हैं। हाथरस, एटा की बस लखनऊ चली गई हैं तो इसके लिए अन्य बसों के चक्कर बढ़वाए हैं। प्रयास रहेगा कि जल्द इस समस्या का निस्तारण हो जाए। मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम।