सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामले लगातार उजागर हो रहे हैं। शिकायत के आधार पर हुई जांच में खुलासा हुआ है कि तीन दशक पहले सरकारी नाली को निजी भूखंड में मिलाकर उसका बैनामा कर दिया गया और उस पर भवन बना लिया गया। तहसील टीम ने पैमाइश के बाद अपनी जांच रिपोर्ट डीएम, मंडलायुक्त व नगर निगम को सौंप दी है। चूंकि, यह सरकारी नाली नगर निगम की है, इसलिए नगर निगम स्तर से कब्जा हटाने संबंधी निर्णय लिया जाएगा।
शिकायतकर्ता राजकुमार गोयल निवासी रामबाग क्वार्सी की ओर से यह शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई थी। शिकायत में कहा गया कि रामघाट रोड पर दीनदयाल अस्पताल के सामने गाटा संख्या 683 मौजा क्वार्सी में 0.0140 हेक्टेयर रकवा की अकृषक जलमग्न भूमि एक सरकारी नाली हुआ करती थी। इस नाली के जरिये शहरी आबादी का पानी क्वार्सी बाईपास की माइनर में जाता था। तीन दशक पहले यहां बैनामे के बाद भूखंड और नाली पर निर्माण करा लिया गया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर हुई शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने तहसील टीम से इसकी जांच कराई।
तहसील टीम ने मौके पर पैमाइश करते हुए पुराने प्रपत्र, नक्शा देखकर पाया कि गाटा संख्या 682 व 684 भूखंडों के बीच 683 सरकारी नाली जलमग्न अकृषक भूमि दर्ज है। 1991 में भूखंड संख्या 684 का उसके स्वामी द्वारा कुछ लोगों को इकरारनामा किया गया। जिसमें 683 पर नाली दर्ज है। उस इकरानामे के आधार पर 1993 में उसी 684 नंबर के भूखंड का बैनामा, जब किसी अन्य को किया गया तो उसमें 683 पर नाली अंकित नहीं की, बल्कि 683 के रकबे को 684 में समाहित दिखा दिया गया। 684 नंबर के भूखंड की पैमाइश में रकवा भी अधिक पाया गया है। नक्शा मिलान पर सीमा में भी अंतर पाया गया है।
जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 683 गाटा की नाली को 684 भूखंड में मिला लिया गया है। अब उस पर भवन बना है। यह संपत्ति नगर निगम के अधीन है। इस संबंध में तहसीलदार की ओर से रिपोर्ट डीएम और अपर नगर मजिस्ट्रेट की ओर से मंडलायुक्त को दी गई है। जिसे मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपडेट किया गया है।
- शिकायत के आधार पर मौके पर पैमाइश व जांच कराई गई थी, जिसमें पाया गया कि सरकारी भूमि/नाली को भूखंड में मिला लिया गया है। इस संबंध में रिपोर्ट जिला स्तर पर व नगर निगम को भेज दी गई है। चूंकि, भूमि नगर निगम की है। इसलिए कब्जा हटाने या न हटाए जाने संबंधी निर्णय नगर निगम स्तर से ही लिया जाएगा। - रविशंकर, एसडीएम कोल।