इसके एवज में एक करोड़ नकद व 11 लाख रुपये खाते में प्राप्त कर लिए हैं। आरोप है कि स्टांप पेपर पर जाली एवं कूटरचित रसीद 12 मार्च 2021 को होना दर्शाया है। जबकि 14 सितंबर 2019 को स्टांप वेंडर की मृत्यु हो चुकी थी। इसके अलावा दर्शाया गया वेंडर पंजीयन नंबर भी फर्जी है। सुबोध कुमार ने कहा है कि वृद्ध होने व चलने-फिरने में असमर्थ होने पर अलीगढ़ स्थित संपत्ति की देखरेख नहीं कर पा रहे हैं।
पूर्व में भी विराट पचौरी, मुन्ना लाल पचौरी, उमेश गौतम, शैलेंद्र गौतम और यादवेंद्र गौतम द्वारा उनके जाली एवं कूटरचित हस्ताक्षर बनाकर फर्जी लीज डीड बनाई थी। इसको लेकर थाना बन्नादेवी में मुकदमा दर्ज हैं। जिसमें फारेंसिक जांच में मेरे हस्ताक्षर कूटरचित पाए गए हैं। उधर, प्रापर्टी डीलर योगेंद्रपाल सिंह का कहना है कि कारोबारी द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।
जमीन के बदले लिए एक करोड़ 11 लाख रुपये वापस न करने पड़े इसको लेकर उन्होंने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। जबकि उन्होंने खुद कारोबारी सुबोध कुमार के खिलाफ 11 सितंबर 2024 को थाना बन्नादेवी में मुकदमा दर्ज कराया है। एक परिवाद भी न्यायालय में दायर किया गया है। संबंधित जमीन पर पिछले कई सालों से उनका कब्जा बरकरार है। इस संबंध में एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है।