सर्दी और रात को जबरदस्त कोहरे के चलते ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लेटलतीफी का एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए गरीब रथ 53 घंटे देरी के साथ अलीगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर पहुंची। माना जा रहा है कि अब तक की जानकारी में अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर देरी से पहुंचने वाली ट्रेनों में यह लेटलतीफी का यह रिकार्ड है। इसके अलावा अन्य ट्रेनें भी 10 से 25 घंटे तक देरी से चल रही हैं। कोहरे के चलते रोडवेज बसों के पहियों की रफ्तार भी धीमी हुई है। साथ ही निजी परिवहन व्यवस्था भी गड़बड़ हुई है। सबसे ज्यादा परेशानी रात में चलने वाले वाहनों को हो रही है।
सर्दी में यात्रियों का कष्ट
अलीगढ़। इस सर्द मौसम में यात्रियों को सबसे ज्यादा समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन पर अधिकांश यात्री द्वितीय श्रेणी के टिकट पर यात्रा करने वाले हैं। रेलवे स्टेशन पर द्वितीय श्रेणी का प्रतीक्षालय चारों और से खुला हुआ है। रात के समय यहां पर सर्द हवा यात्रियों के लिए बेहद कष्टकारी होती है। अधिकांश यात्री यहां पर अपने कंबलों और रजाइयों में लिपट कर रात काटते हैं। इसी प्रकार रोडवेज बस स्टैंड पर भी यात्रियों के लिए कोई अच्छी स्थिति नहीं है। गांधी पार्क बस स्टैंड पर कोई भी ऐसा कवर्ड ऐरिया नहीं है, जहां पर बस यात्री आराम से रात गुजार सकें या देरी से आ रही बस की प्रतीक्षा कर सकें।
आज नहीं चलेंगी लिंक-संगम
कोहरे की वजह से रेलवे ने सोमवार को लिंक एक्सप्रेस कैंसिल कर दी है। यह ट्रेन सोमवार को नहीं आएगी। सोमवार को लिंक संगम एक्सप्रेस (14164) नहीं चलेगी। यह जानकारी एनसीआर के पीआरओ अमित मालवीय ने दी।
हीटिंग उपकरणों की खरीद बढ़ी
अलीगढ़। हीटिंग उपकरण बेचने वालों को नोटबंदी से बाजार में आयी ठंडक से उबरने और इस बाजार में गरमाहट आने के लिए सर्द मौसम बेहद मुफीद साबित हो रहा है। पिछले कुछ दिनों में, जब से मौसम के तेवर जरा सख्त हुए हैं, तब से हीटर, गीजर, थर्मस आदि की बिक्री बढ़ी है। साथ ही ऐसे उपकरण जो अभी तक खराब थे, उनकी मरम्मत के लिए भी लोगों ने मैकेनिकों का रुख किया है।
छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रही सर्दी
अलीगढ़। छोटे बच्चों के लिए यह सर्दी कहर साबित हो रही है। सबसे ज्यादा मार बच्चों पर पड़ रही है। खास तौर से शिशुओं के लिए सर्दी की इस अंदाज में शुरुआत बेहद खतरनाक साबित हो रही है। प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मल्होत्रा कहते हैं कि इस समय वातावरण में आर्द्रता बढ़ी है। इससे माइक्रोफाइन पार्टिकल और डस्ट वातावरण से निकल नहीं पा रही है। यही धुंध या कोहरे की तरह दिख रही है। यह सांस के जरिये बच्चों के फेफड़ों में जा रही है। साथ ही एलर्जी, डिहाईड्रेशन, विंटर डायरिया, निमोनिया भी हो रहा है। इससे छोटे बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं।