महानगर के प्रमुख हिंदूवादी नेता व विहिप महानगर अध्यक्ष देवसुमन गोयल के हुंडी (फाइनेंस) कारोबारी भाई गौरव गोयल के नौकर संग बृहस्पतिवार को दिनदहाड़े हुई 20 लाख की लूट के नाटक से चंद घंटों में ही पर्दा उठ गया।
रकम हड़प करने के इरादे से खुद नौकर ने ही अपने फुफेरे भाई व दोस्त संग मिलकर इस कथित वारदात का नाटक रचा और मीनाक्षी पुल पर अपने साथ लूट को अंजाम दिलाया। मगर जब पुलिस जांच बढ़ी तो भेद खुल गया और कुछ ही घंटे में कथित तौर पर लूटी गई पूरी रकम बरामद हो गई और नौकर सहित लूट में शामिल दो अन्य आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए। मगर देर रात समाचार लिखे जाने तक कारोबारी की ओर से पुलिस को घटना के संबंध में कोई तहरीर नहीं दी गई थी, जिसे लेकर पुलिस तरह-तरह के कयास लगा रही है।
गूलर रोड निवासी गौरव गोयल पुत्र आदर्श गोयल का आईटीआई रोड पर ताले का कारखाना है।
मगर वह अपने घर से ही हुंडी का पुश्तैनी धंधा भी करते हैं। बृहस्पतिवार दुपहर करीब सवा दो बजे गौरव का नौकर मनोज अपने मालिक के किसी पारिवारिक मित्र के ज्ञानसरोवर-मानसरोवर स्थित घर से बीस लाख रुपये लेकर लौट रहा था। उसने रकम स्कूटी की डिग्गी में डाल रखी थी। वापसी में उसे अचलताल और पत्थर बाजार होते हुए लौटना था। वह जैसे ही मीनाक्षी पुल पर पहुंचा, तभी पीछे से काली पल्सर बाइक पर दो बदमाश उसके बराबर आए और चलती स्कूटी पैर मारकर गिरा दी।
इसके बाद उस पर तमंचा तान दिया। फिर मारपीट कर उसकी चाभी छीनकर डिग्गी से 20 लाख रुपये निकाल लिए और चाभी व रुपये लेकर वापस रामघाट रोड की ओर लौट गए।
इस खबर पर एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव, सीओ तृतीय राजीव सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस एसके वर्मा, एसओजी/सर्विलांस टीम भी पहुंच गई।
खुद देव सुमन गोयल, विहिप नेता अभिराम गोयल, व्यापारी नेता सौरभ सिक्ससंस आदि भी पहुंच गए। पूछताछ के बाद पुलिस नौकर मनोज को अपने साथ थाना सिविल लाइंस ले गई। जहां उससे काफी देर तक चली पूछताछ में सच सामने आ गया। उसकी बताई कहानी पर पुलिस ने बुलंदशहर के डिबाई में दबिश देकर मनोज के फुफेरे भाई अरविंद निवासी डिबाई व मनोज के मित्र हृदयेश निवासी एटा चुंगी को दबोच लिया गया। दोनों से 20 लाख रुपये भी बरामद हो गए।
अरविंद एक कुरियर कंपनी में जॉब करता है, जबकि हृदेश अभी स्नातक छात्र है।
गिरफ्तारी के बाद जब तीनों का आमना-सामना हुआ तो उन्होंने बताया कि मनोज अपने मालिक की रकम इधर से उधर ले जाता है। हम तीनों को ही रुपयों की जरूरत थी। इसलिए खुद ही मनोज व हमने मिलकर यह कथित लूट का नाटक रचा था। इधर, देर रात तक पुलिस को लूट के संबंध में तहरीर नहीं मिली थी।