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आजादी के मतवालों के हौसले नहीं डिगा पाए थे अंग्रेज अफसर

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शहीद रमेशचन्द्र आर्य - फोटो : VIJAYGARH
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इकराम वारिस
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आजादी के मतवालों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। उनके आंदोलनों से अंग्रेजी हुकूमत की बुनियाद हिलने लगी थी। अंग्रेजों की खीझ बढ़ती जा रही थी। आंदोलनों में शामिल वीर सपूत उनके निशाने पर रहते थे, मगर सेनानियों के हौसले को जेल और जेलर भी डिगा नहीं पाए थे। आखिरकार, अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा। 15 अगस्त 1947 को लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा लहरा रहा था।
1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल होने सुप्रसिद्ध कथाकार जैनेंद्र की पढ़ाई में रुक गई थी। वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे। जैनेंद्र वर्ष 1930 व 1932 में जेल भी गए। इसी दौरान वह साहित्य सेवा की ओर उन्मुख हुए। क्रांतिकारी रामस्वरूप गुप्ता 1942 के असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। इससे उनका कारोबार चौपट हो गया। एक राशन की दुकान, दो किराने की दुकानें अंग्रेज अफसरों ने सील कर दीं। एक अगस्त 1943 को उन्हें पकड़ कर जेल भेज दिया गया था। 1941 में मदनलाल हितैषी ने सत्याग्रह आंदोलन में शामिल होने पर एक साल की सजा काटी। उन पर 25 रुपये जुर्माना लगाया गया। वर्ष 1942 की क्रांति में उन्हें दो साल की सजा मिली। स्टेशन बस केस में नौ महीने नजरबंद रहे। आफताब अहमद भी जेल गए। अंग्रेज सरकार से बगावत करने के जुर्म में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन 1947 में देश आजाद होने पर सरकार ने सभी आरोप रद कर उन्हें आजाद कर दिया। आंदोलनों में भाग लेने पर उन्हें 50 से अधिक बार गिरफ्तार किया गया। साइमन कमीशन को काला झंडा दिखाने के आरोप में गंगाधर शर्मा को पकड़ लिया गया था। उन्हें जेल में डाल दिया गया था। वह कोलकाता की अलीपुर जेल में रहे। वह छह बार जेल गए। वह 1952 से 1957 तक विधायक रहे।
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डीएस कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, आजादी देश से मोहब्बत और एकजुटता से मिली है। आपसी सौहार्द ने अंग्रेजों की हुकूमत की डोर कमजोर कर दी थी। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि कस्तूरी देवी ने सुदामापुरी बिजलीघर पर 9 अगस्त 1942 को विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी। वर्ष 1940 में जब सरकार विरोधी सत्याग्रह हुआ तो रेलवे रोड पर छेदा लाल, हेम सिंह नागर के साथ नवाब सिंह चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने तीन साल सजा काटी। तोताराम राठी 1921 में पहली बार जेल गए। 1930 में लगान बंदी आंदोलन के लिए उन्हें छह महीने की फिर कैद हुई।
इनके अलावा, ठा. मलखान सिंह को 1921 को अलीगढ़ आंदोलन में तीन महीने, 1930 में नमक आंदोलन में दो साल की कैद हुई। बनारसी दास भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ्तार किए गए। मोहनलाल गौतम भारत छोड़ो आंदोलन में कई बार जेल गए। हकीम तुलसी दास, तसद्दुक अहमद खान शेरवानी, सोवरन सिंह भी आजादी की खातिर जेल गए। तसद्दुक अहमद खान शेरवानी ने 1920 में गोहत्या के खिलाफ कई कार्यक्रम किए थे।
विजयगढ़ में रमेश चंद्र आर्य ने अपने साथी चंद्रगुप्त आर्य, रघुवरदयाल आर्य व कुछ अन्य साथियों के 15 जून 1947 को रमेश चंद्र अपने घर पर ही थे। पुलिस को उनके घर पर रहने की किसी मुखबिर ने सूचना दी थी। पुलिस की एक टुकड़ी ने उनकी तलाश में दबिश दी। रमेश चंद्र को पकड़ लिया गया और जेल में उनकी मौत हो गई।
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एएमयू के छात्र ने दिया इंकलाब जिंदाबाद का नारा
एएमयू के जानकार डॉ. राहत अबरार ने बताया कि एएमयू के छात्र रहे मौलाना हसरत मोहानी ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया था। मौलाना मोहानी को 1908 में पहली बार अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया।
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