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Aligarh News: अलीगढ़ जंक्शन पर ''बीमारियों का नाश्ता'' बेसन में मक्खियां, गंदगी में पकौड़े

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रेलवे स्टेशन के सामने गोदाम में बेसन के घोल में पड़ी मक्खियां। - फोटो : samvad
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अलीगढ़ जंक्शन पर बिकने वाले पकौड़े देखकर शायद आपका भी मन ललचा जाए, लेकिन उनकी रसोई की तस्वीरें देखकर भूख गायब हो सकती है। प्लेटफॉर्म पर ताजा दिखने वाला यह नाश्ता मक्खियों और गंदगी के बीच तैयार हो रहा है। बेसन के घोल पर भिनभिनाती मक्खियां, खुले में रखे पकौड़े और अस्वच्छ माहौल यात्रियों की सेहत के साथ हो रहे खिलवाड़ की कहानी बयां कर रहे हैं।





सोमवार दोपहर जब दिल्ली से आने वाली और वाया कानपुर ट्रेन नंबर 12420 लखनऊ जाने वाली ट्रेन जब अलीगढ़ जंक्शन पहुंचते ही प्लेटफॉर्म पर गरमा गरम पकौड़ों की आवाजें सुनाई देने लगीं। अलग अलग डिब्बों से यात्रियों ने ऑर्डर देना शुरू किया और बाहर से वेंडर हरी मिर्च के साथ पकौड़े दे रहे थे। इन्हीं पकौड़ों की हकीकत जानने के लिए वेंडरों के गोदाम स्थित रसोई की तलाश की, जहां का नजारा चौंकाने वाला था।
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रसोई में बड़े बर्तनों में रखा बेसन का घोल खुला पड़ा था, जिस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। पास ही तैयार हो रहे पकौड़े बिना किसी ढकाव के ट्रे और टोकरी में रखे मिले। जिस स्थान पर खाद्य सामग्री तैयार की जा रही थी, वहां साफ-सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखे। फर्श पर गंदगी, बर्तनों के आसपास कचरा और खाद्य सामग्री के बीच मक्खियों की मौजूदगी साफ दिखाई दी।



इसी रसोई से तैयार नाश्ता 20 रुपये प्रति प्लेट यात्रियों को दिया जा रहा है।


गोदाम से प्लेटफॉर्म तक नाश्ता ले जाने के लिए कुल 80 वेंडर हैं जिनमें आधे दिन और बाकी रात में ड्यूटी देते हैं। अलीगढ़ जंक्शन से रोजाना 250 ट्रेन गुजरती हैं जिनमें से 46 का यहां ठहराव है। इनमें से छह पैसेंजर और अन्य सुपर फास्ट व मेल हैं। इन सभी ट्रेन से प्रतिदिन 25 से 30 हजार यात्री आवागमन कर रहे हैं।

प्लेटफॉर्म पर घूम रहे वेंडर ही बताते हैं कि उनके पहले ग्राहक जनरल और स्लीपर में बैठे यात्री होते हैं क्योंकि एसी कोच में उनका प्रवेश वर्जित है और नॉन एसी चेयर कोच में अधिकांश सुबह-शाम आवागमन करने वाले यात्री होते हैं जिनमें से बहुत ही कम नाश्ता खरीदते हैं।
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मानक सख्त, फिर भी लापरवाहीखाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार खाद्य सामग्री को ढककर रखना, निर्माण स्थल को स्वच्छ रखना और मक्खियों व कीटों से सुरक्षा के इंतजाम करना अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।






यात्रियों के खानपान से संबंधित अगर लापरवाही है तो उनके खिलाफ रेलवे की ओर से कार्रवाई की जाएगी। - अमित कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे







यात्रियों को क्या हो सकता है खतरा



फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त, पेट में संक्रमण, टायफाइड और हैजा जैसी बीमारियों का जोखिम


रेलवे स्टेशन के सामने गोदाम में बेसन के घोल में पड़ी मक्खियां।- फोटो : samvad

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