डॉ. हामिद अशरफ ने दावा किया है कि पैथोलॉजी लैब की जांच रिपोर्ट से ज्यादा असरदार उनकी डिवाइस की रिपोर्ट है। लैब में शुगर की जांच की शुद्धता 70-80 फीसदी है, जबकि डिवाइस की जांच 90-95 फीसदी शुद्ध है। खास बात है कि इस डिवाइस में एक मिनट में रिपोर्ट आ जाती है, जबकि लैब में 10-15 मिनट में जांच रिपोर्ट आती है। डिवाइस से समय और पैसे की बचत होगी।
छह महीने में एक हजार लोगों पर शोध
डॉ. नदीम अख्तर ने बताया कि छह महीने में एक हजार लोगों पर शोध किया गया है। एएमयू में राजीव गांधी मधुमेह और एंडोक्राइनोलॉजी केंद्र में आने वाले 500 लोग जिन्हें शुगर नहीं था और 500 लोग, जिन्हें शुगर था। उनकी आंखों की पुतलियों और झिल्लियों की तस्वीर लेकर उसे एआईएलम से जांच की गई, तो पता चला कि जिन्हें शुगर नहीं था, उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई और जिन्हें शुगर था, उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
नवाचार को कराएंगे पेटेंट
डॉ. हामिद अशरफ ने कहा कि अपने नवाचार को पेटेंट भी कराएंगे। अगर यह बाजार में आ गया तो शुगर की जांच आसानी से हो जाएगी। हालांकि, शुगर के नाम पर मशीनें पहले से बाजार में हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट की शुद्धता पर हमेशा संदेह रहता है। उन्होंने कहा कि इस नवाचार के लिए उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सम्मानित भी किया है।