जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव बुरी तरह से हारने के बाद समाजवादी पार्टी अब ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भी औंधे मुंह गिर गई है। महज आठ महीने के बाद वर्ष 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, प्रदेश में सरकार बनाने का दावा ठोक रही पार्टी जिले में एक भी ब्लॉक प्रमुख नहीं बनवा सकी। आगामी 25 अगस्त को जिलाध्यक्ष गिरीश यादव (निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख, लोधा) की ताजपोशी हुए एक वर्ष पूरा हो जाएगा। इस अवधि में वह पार्टी को एक भी चुनाव नहीं जिता सके।
हालात यह हैं कि जो जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीतने के बाद उनके साथ थे, वो देखते ही देखते भाजपा की गोद में बैठ गए। ब्लॉक प्रमुख चुनाव में इससे बुरा हाल हुआ हैै। जिन्होंने दो दिन पूर्व ही सपा से नामांकन किया वो नाम वापसी के दिन भाजपा की गोद में बैठ गए। अब सपा नेता अपनी बेहद लचर रणनीति को छिपाने और हार की खिसियाहट मिटाने के लिए इसका कारण ‘सत्ता का दबाव’ बता रहे हैं। सपा के साथ ही कांग्रेस, बसपा और रालोद का भी यही हाल है।
अकराबाद ब्लॉक प्रमुख पद पर सपा के समर्थन पर नामांकन करने वाले अनुज प्रताप सिंह इससे पहले भाजपा से आशीर्वाद जुटाने के लिए प्रयासरत थे। बीती 28 जून को जब भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल अलीगढ़ आए थे, तो अनुज सर्किट हाउस में उनसे मिले और अपना आवेदन भी किया। सांसद खेमे के कुछ नेता उनकी मजबूत पैरोकारी कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बनी। भाजपा से मायूस अनुज ने रातोंरात सपा के समर्थन पर बुधवार को नामांकन कर दिया। नामांकन करने के बाद वह ठीक से प्रचार कर पाते कि इससे पहले ही भाजपा नेता एमएलसी ठा. जयवीर सिंह के कहने पर उन्होंने शुक्रवार को नाम वापस ले लिया। हालांकि, अंदरखाने सभी को मालूम था कि अनुज भाजपा से टिकट मांग चुके हैं और उनकी सपा में कोई निष्ठा नहीं है।
इस संबंध में जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने रटारटाया जवाब दिया कि सत्ता के दबाव में नाम वापस लिए गए हैं। अकराबाद से अनुज प्रताप और इगलास से स्नेहलता ने नाम वापसी की है। सपा के जिला कोषाध्यक्ष गुड्डा यादव की मामी गंगीरी से निर्दलीय प्रत्याशी हैं, उन्होंने सपा के समर्थन को प्रचारित करने से इंकार कर दिया, क्योंकि अंदरखाने उनको भी दबाव बनाए जाने की संभावना दिख रही है। इसलिए वह निर्दलीय ही मैदान में डटी हैं।
बहरहाल, अब सपा नेता कुछ भी कहें। अमर उजाला ने बीती तीन जुलाई के अंक में पेज नंबर दो पर ‘ब्लॉक प्रमुख चुनाव की तैयारियां शुरू : भाजपा में दावेदारों की लाइन और शेष विपक्ष सन्नाटे में’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसमें सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने कहा था कि ब्लॉक प्रमुख पद के लिए उस दिन तक कोई दावेदार नहीं आया था। इससे यह स्पष्ट है कि पार्टी ब्लॉक प्रमुख जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए योग्य उम्मीदवार तक नहीं तलाश सकी। ये हाल तब हुआ जब खुद जिलाध्यक्ष गिरीश यादव निवर्तमान लोधा ब्लॉक प्रमुख हैं और हरेक दांवपेंच अच्छी तरह से जानते हैं।
बसपा सुप्रीमो ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पहले से ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद और ब्लॉक प्रमुख पद चुनाव को गंभीरता से नहीं लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद पार्टी के जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह ने कहा था कि इन चुनाव में अब ज्यादा जोर नहीं दे रहे हैं। सपा, बसपा के साथ ही कमोबेश रालोद और कांग्रेस भी इस चुनाव में चारो खाने चित्त दिखी।