बीएलओ की ड्यूटी में कार्रवाई को लेकर झमेला सामने आया है। कुछ ऐसे शिक्षक-शिक्षिकाओं को निलंबित कर दिया गया जिन्होंने ड्यूटी की अथवा अवकाश स्वीकृत करा लिया था। इससे शैक्षिक संगठन में काफी रोष है। कई निलंबित शिक्षिकाओं ने इसे लेकर बीएसए के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।
पिछले दिनों बीएसए ने मतदाता सूची पुनरीक्षण में बीएलओ की ड्यूटी न करने पर संबंधित एसडीएम व खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर आधा दर्जन शिक्षिकाओं को निलंबित कर दिया था। इसके बाद प्राथमिक शिक्षक संघ की महानगर इकाई ने रोष जाहिर किया था। इकाई के अध्यक्ष अंसार कुरैशी, मंत्री अजयपाल सिंह, कोषाध्यक्ष बिंदु शर्मा का कहना था कई शिक्षिकाओं ने बीएलओ की ड्यूटी की और कई ने अवकाश भी उच्च अधिकारियों से स्वीकृत करा लिया, लेकिन गलत रिपोर्ट के आधार पर इन्हें निलंबित कर दिया है।
शिक्षक संघ के पदाधिकारी इसे लेकर बीएसए को मिले थे और उनके समक्ष साक्ष्य भी दिए थे।
निलंबित शिक्षिका शाइस्ता परवीन ने दिए साक्ष्य के साथ कहा है कि उसने बीएलओ की ड्यूटी प्राप्त की थी और वह सर्वे कर रही है, लेकिन फिर भी उसे निलंबित कर दिया। एक अन्य शिक्षिका अर्चना वार्ष्णेय का बीएलओ का भी काम पूरा होने के कगार पर है, लेकिन उसे भी निलंबित कर दिया। शिक्षिका रंजना का कहना है कि उसने बीएलओ की ड्यूटी से खुद को हटाने के लिए एडीएम (प्रशासन) को प्रार्थना पत्र दिया था और एडीएम ने इस प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया था। उसने इस प्रार्थना पत्र को बीएसए के समक्ष पेश किया।
बीएसए धीरेंद्र कुमार का कहना है कि यह कार्रवाई संबंधित एसडीएम व खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद की गई है। कई शिक्षकों ने ड्यूटी आदि करने के साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उसके आधार पर उनका निलंबन वापस लिया जाएगा।