जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में प्रचंड जीत के बाद भाजपा ने ब्लॉक प्रमुख पद के चुनावों में बेहतरीन प्रबंधन की मिसाल पेश की है। पार्टी ने जिले के 12 ब्लॉक प्रमुख पद में से 10 में र्निविरोध जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। पार्टी ने कुछ स्थानों पर पहले से मजबूत प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया था, जिनका नाम घोषित नहीं हुआ था, लेकिन वह अंदरखाने तैयारी कर रहे थे। कुछ दावेदारों ने अपने समर्थक बीडीसी को अलीगढ़ से बाहर सुरक्षित स्थानों पर ठहराया था। इसके बाद जहां पार्टी को योग्य उम्मीदवार नहीं मिला। वहां पहले से मौजूद ताकतवर प्रत्याशी को अपने खेमे में कर लिया गया। अकराबाद से राहुल सिंह, गोंडा से नरेंद्र चौधरी, लोधा से हरेंद्र सिंह, जवां से हरेंद्र सिंह कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं। इन सभी पर पार्टी ने पूरा जोर लगा कर जिताया।
पार्टी ने पूरे पंचायत चुनाव में सधी हुई रणनीति के साथ आक्रामक राजनीति से लोगों को अवगत कराया। विपक्षी दल इसकी कोई काट नहीं ढूंढ पाए। ये भी कहना गलत नहीं होगा कि विपक्ष के पास न तो प्रत्याशी थे, न ही सधी हुई रणनीति। इसलिए भाजपा की जीत आसान हो गई। भाजपा के सांसद, विधायक, जिला महानगर कमेटी से लेकर पंचायत चुनाव के लिए नियुक्त पदाधिकारी ब्लाक प्रमुख चुनावों में शानदार जीत के लिए संगठन की मेहनत को श्रेय दे रहे हैं, लेकिन पार्टी के लिए ये जीत बड़ी जिम्मेदारी भी बन गई है क्योंकि असल परीक्षा विधानसभा चुनाव 2022 में होगी। जब चुनाव जीतना इतना आसान नहीं होगा, जितना अभी था। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव जनता से सीधे नहीं हुए हैं। इसलिए इसका महत्व दूसरा है और विधानसभा चुनाव का दूसरा।