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‘बीफ बिरयानी’को लेकर भाजपा सांसद और मेयर में विरोधाभास

Mon, 22 Feb 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
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एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज कैंटीन में ‘बीफ बिरयानी’ परोसे जाने के विवाद के बाद रविवार को कैंटीन में नये बोर्ड लगा दिए गए हैं। इसमें उबले अंडे, आमलेट, मटन और चिकन बिरयानी का जिक्र तो है, पर बीफ बिरयानी या बफैलो मीट का उल्लेखन नहीं।
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विवाद के बाद एएमयू इंतजामिया कैंटीन का नया टेंडर 23 फरवरी को निकालेगा। इधर, इस मुद्दे पर भाजपा सांसद सतीश गौतम और मेयर शकुंतला भारती के विरोधाभासी बयान से भाजपा का ‘अंर्तद्वंद’ भी खुलकर सामने आ गया है।

सूत्र बताते हैं कि सांसद उन्हें विश्वास में लिए बिना बीफ बिरायनी के मुददे को हवा देने वाले संगठनों से खासे नाराज हैं। ऐसे अति उत्साहित कार्यकर्ताओं को अब आड़े हाथ लेने की तैयारी है। इस बारे में संगठन के प्रदेश और केंद्रीय नेताओं को अवगत करा दिया गया है।
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मैं यहां का जनप्रतिनिधि और सांसद हूं। उनके पास हिंदूवादी संगठनों या मेयर की ओर से कोई सूचना नहीं आई। ‘बीफ बिरयानी’ के मुद्दे पर वे कहां गए ? किस अफसर से मिले ? मेयर कहां गई हैं ? इसकी उन्हें जानकारी नहीं दी गई। जब मेरे संज्ञान में कुछ नहीं तो फिर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी तक प्रकरण को पहुंचाने का कोई मतलब नहीं। कैंटीन संचालक ने कहा है कि टेंडर के लिए ‘बीफ बिरयानी’ का जिक्र किया था, जो मजबूरी है। मुझे एएमयू कुलपति पर भरोसा है। हमें अफवाहों से दूर जिम्मेदार पदों पर तैनात प्रतिष्ठित लोगों पर भरोसा करना होगा। ऐसी अफवाहों से माहौल खराब होता है।
-सतीश गौतम, सांसद

कैंटीन का नया टेंडर 23 फरवरी को प्रॉपर्टी विभाग की ओर से उठा दिया जाएगा। बीफ बिरयानी शब्द को लेकर बेवजह विवाद को जन्म दिया गया। अब कहीं भी कोई मतभेद नहीं है। कुलपति ले.जनरल जमीरउद्दीन शाह और सांसद सतीश गौतम के बीच इस मामले पर पूरी बातचीत हो चुकी है। दोनों एकमत हैं कि एएमयू में गौमांस का इस्तेमाल नहीं होता।  
 -डा. राहत अबरार, जनसंपर्क अधिकारी

सांसद सतीश गौतम बुद्धिजीवी हैं। सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं। एएमयू कुलपति ने उनसे बात की है, जिसमें कुलपति ने खुद अपनी तरफ से गौमांस का प्रयोग नहीं होने का भरोसा दिलाया है। लेकिन ये भी संभव है कि सांसद जी को सही फीडबैक न दिया गया हो। एएमयू इंतजामिया उन्हें गुमराह कर रहा हो। अन्यथा रविवार को कैंटीन का मीनू बदलने, नया मीनू बोर्ड लगाने की क्या जरूरत थी? जिला प्रशासन भी एएमयू कैंटीन या अंदर के किचन में जाकर बीफ की जांच करने कतरा रहा है। पुलिस भी वहां तब पहुंची जब कैंटीन से सब कुछ गायब हो चुका था।
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 -शकुंतला भारती, मेयर

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