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भाजपा बारहद्वारी कार्यालय पर मांगा बुजुर्ग भाजपा नेता ने कब्जा

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वर्ष 1984 से बारहद्वारी स्थित अशोका निवास में संचालित भाजपा महानगर कार्यालय पर संगठन के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने अपना कब्जा मांगा है। उन्होंने भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी को पत्र लिखकर कहा है कि यह भवन रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत उनके नाम आवंटित है। अब पार्टी का नया कार्यालय बन गया है। इसलिए इस भवन पर उन्हें कब्जा दिलाया जाए।
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इस बारे में भाजपा नेता ने कहा है कि यह कार्यालय 1984 से संचालित है। एक बार यहां कांग्रेस ने अपने शासन काल में कब्जा करने का प्रयास किया था। मगर हमने पार्टी के अन्य सहयोगियों की मदद से ऐसा नहीं होने दिया। तत्कालीन जिलाधिकारी ने विवाद को देखते हुए समझौता वार्ता कराते हुए रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत इस भवन का एक हिस्सा युवक कांग्रेस के नेता राजेंद्र मेहरा व एक हिस्सा मेरे नाम 1768 रुपये प्रतिमाह किराए में आवंटित किया था। जिसका जून 2022 तक किराया 7 लाख 99 हजार 136 रुपये व गृहकर 51946 गृहकर है। जिसका मुकदमा भवन स्वामी ने दायर किया। इस पर खुद आवेदक ने निजी प्रयासों से मुकदमा लड़ा। जिसमें वाद व्यय खर्च किया। अब भवन स्वामी द्वारा नोटिस देकर वसूली के लिए प्रयासरत है। कई बार उसे चेतावनी भी दी गई है। अन्यथा उसे मुकदमा भी झेलना पड़ सकता है। अत: अब पार्टी ने अपना कार्यालय बना लिया है। यह बेहद खुशी की बात है। ऐसे में बारहद्वारी कार्यालय भवन पर कब्जा दिलाया जाए। इसे लेकर भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत का कहना है कि विषय पार्टी के वरिष्ठ पदाधिरियों के समक्ष रखा जाएगा। वहां से जो भी निर्देश मिलेगा, उसी के आधार पर निर्णय होगा।
वरिष्ठ व बुजुर्ग कार्यकर्ता नहीं बुलाए उद्घाटन में
इस शिकायत में यह भी जिक्र किया गया है कि पार्टी के नए कार्यालय के शुभारंभ पर बुजुर्ग व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को नहीं बुलाया गया। यह पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा है।
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तहसील टीम को जांच में मिला भाजपा कार्यालय
भाजपा के नवनिर्मित कार्यालय का मुद्दा अभी थमा नहीं है। आईजीआरएस पर आरटीआई कार्यकर्ता केशवदेव द्वारा शिकायत की गई। जिसमें असदपुर कयाम स्थित भाजपा कार्यालय के मानचित्र को लेकर जानकारी मांगी गई। इस पर एडीए ने जवाब दिया था कि वहां कोई निर्माण होता नहीं मिला। वहीं तहसील कोल के राजस्व निरीक्षक ने अब इस मामले में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वहां कार्यालय बना हुआ है। जो निजी भूमि पर निर्मित है। वह भूमि ऊसर व सरकारी ग्राम सभा की भूमि नहीं है।
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