पार्षद संजीव कुमार ने बताया कि यह महिला उनके पास पिछले माह आई थी। वह पार्षद के साथ-साथ खुद का जनसेवा केंद्र भी चलाते हैं। जहां तमाम तरह के प्रमाण पत्र बनवाते हैं। उनके यहां आवेदन पर दस से पंद्रह दिन प्रमाण पत्र बनने में लगते हैं। उन्होंने इस महिला का आवेदन लेकर नगर निगम में दिया था। मगर 15 दिन में भी जब प्रमाण पत्र नहीं बना तो महिला उन पर दबाव डाल रही थी। बाद में उन्होंने नगर निगम लिपिक से पूछा तो लिपिक ने आवेदन खो जाने का तर्क दिया। इस पर महिला ने पार्षद से अपनी फीस ने रुपये वापस ले लिए और अगले तीन दिन में जन्म प्रमाण पत्र लेकर वापस पार्षद के पास पहुंची। चुनौती देते हुए कहा कि तुम नहीं बनवा पाए, हमने बनवा लिया। यह देख पार्षद दंग रह गए। महिला ने कहा कि रुपयों से सब कुछ होता है। तब वे नगर आयुक्त के पास आए थे।
नगर आयुक्त ने बदली व्यवस्था, फर्जीवाड़ा रोकेगा नगर निगम
इस प्रकरण के खुलासे के बाद नगर आयुक्त अमित आसेरी ने व्यवस्था में बदलाव किया है। उन्होंने कहा है कि पार्षद जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जोनल अधिकारी से संपर्क करेंगे। वहीं आवेदन देंगे। वे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र आफिस में नहीं जा सकेंगे। इसके अलावा हर दिन जोनल अधिकारियों के साथ अपर नगर आयुक्त को आवेदनों की समीक्षा करनी होगी। टीम शहर में सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह की अगुवाई में ऐसे फर्जीवाड़ा करने वालों पर कार्रवाई करेगी। जोन वार अलग अलग केंद्रों पर इसके आवेदन किए जाएंगे। क्यूआर कोड स्कैन करके ही सच को जाना जाएगा।